भारत के साथ LAC पर जारी टकराव के बीच पाकिस्तान को चीन से मिलेंगे 4 ड्रोन
बीजिंग। भारत के साथ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर जारी टकराव के बीच ही चीन ने पाकिस्तान को चार अटैक ड्रोन से लैस करने का मन बनाया है। चीन का मकसद इन ड्रोन की मदद से चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीईपीसी) की रक्षा करना है। साथ ही पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी नेवी का एक नया बेस ग्वादर पोर्ट पर है। चीन नहीं चाहता है कि इस पोर्ट पर या उसके कॉरिडोर प्रोजेक्ट को जरा भी आंच आए। यह ताजा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब पिछले दिनों कराची स्टॉक एक्सचेंज पर आतंकी हमला हुआ था जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी।

ग्वादर पोर्ट को लेकर परेशान हैं जिनपिंग
चीन ने सीईपीसी प्रोजेक्ट में 60 बिलियन डॉलर का निवेशा किया और बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव जैसे प्रोजेक्ट्स इसका हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट के तहत आने वाले ग्वादर पोर्ट को वह सबसे अहम मानता है। यह बंदरगाह पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिम में स्थित बलूचिस्तान का हिस्सा है। बलूचिस्तान में इस समय बड़े स्तर पर पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन सभी घटनाक्रमों को देखते हुए चीन ने फैसला किया है कि वह दो ड्रोन सिस्टम को पाक को सप्लाई करेगा। हर सिस्टम में दो ड्रोन और एक ग्राउंड स्टेशन है। चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर 48 GJ-2 ड्रोन तैयार करने की योजना बनाई है। यह विंग लूंग II ड्रोन का मिलिट्री वर्जन है जिसे डिजाइन तो चीन में किया गया है मगर इसका प्रयोग पाकिस्तान एयरफोर्स करती है।

ऑपरेशन के बीच आसमान से गिर रहे ड्रोन
चीन की तरफ से अभी तक 163 ड्रोन करीब एक दर्जन देशों को सप्लाई किए जा चुके हैं जिसमें कजाख्स्तान, तुर्कमेनिस्तान, अल्जीरिया, सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) जैसे देश शामिल हैं। चीन की तरफ से ये सभी ड्रोन साल 2008 से 2018 के बीच सप्लाई किए गए थे। हालांकि बाद में कई देशों ने चीन से शिकायत की थी कि ड्रोन ठीक से काम नहीं कर रहे हैं और बीच ऑपरेशन ही आसमान से गिर जाते हैं। अमेरिका की तर्ज पर चीन ने ड्रोन तो सप्लाई करना शुरू कर दिया मगर उसने अभी कोई ऐसा नियम नहीं बनाया है कि इन ड्रोन को कैसे और किन नियमों के तहत प्रयोग करना होगा।

लीबिया में एक हफ्ते में गिरे 4 चीनी ड्रोन
चीन ने अटैक ड्रोन जिन्हें 12 हवा से जमीन पर हमला करने वाली मिसाइलों से लैस किया गया था, उन्हें लीबिया में यूएई समर्थित सेनाएं प्रयोग कर रही हैं। इन ड्रोन को त्रिपोली में टर्की समर्थित सेनाओं के खिलाफ प्रयोग किया जा रहा है। लीबिया में इन 12 में से चार ड्रोन्स को पिछले माह ही गिरा दिया गया है। यह जानकारी यूके के एनजीओ ड्रोन वॉर्स की तरफ से दी गई थी। इसके अलावा उसके कुछ ड्रोन अल्जीरिया में भी गिरे हैं।
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भारत के पास इजरायल का खतरनाक ड्रोन
जहां एक तरफ पाकिस्तान को चीन से ड्रोन मिल रहे हैं तो भारत भी पीछे नहीं है। भारत इस समय लद्दाख में एलएसी पर अब इजरायल में बने हेरॉन ड्रोन की मदद से निगरानी बढ़ा दी है। इजरायल में बने इन ड्रोन को दुनिया का बेस्ट हथियार माना जाता है। भारत ने साल 2015 में इजरायल से हेरॉन ड्रोन की डील की थी। हालांकि उस समय यह डील इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के लिए की गई थी। लेकिन साल 2017 में सेना के लिए भी ऐसे ड्रोन खरीदने के लिए डील की गई थी। भारत और चीन के बीच पांच मई से पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील पर टकराव जारी है। इसके अलावा इंडियन नेवी के लिए भी अमेरिका से ड्रोन की खरीद पर बातचीत जारी है।












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