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क्या पाकिस्तान में भी सुरक्षित नहीं हैं मुसलमान, शियाओं का राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान

कराची: पाकिस्तान में शिया मुसलमानों को परिवार के जबरिया गायब किए गए लोगों की तलाश के लिए अब एक राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन करने की नौबत आ गई है। लापता शिया मुसलमानों और उनके परिवारों का पता लगाने के लिए वहां के शिया संगठन पाकिस्तान ज्वाइंट ऐक्शन कमिटी ने इसकी घोषणा की है। इसके मुताबिक अगर उनके परिवार वालों की तबतक बरामदगी नहीं हुई तो वह दो अप्रैल से पूरे पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन शुरू कर देंगे। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही भारत ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न पर मानवाधिकार परिषद में उसकी बोलती बंद कर दी थी और भारत के दावों की गवाही खुद पाकिस्तानी मीडिया भी दे रही है।

पाकिस्तान में बड़े आंदोलन की तैयारी में शिया मुसलमान

पाकिस्तान में बड़े आंदोलन की तैयारी में शिया मुसलमान

पाकिस्तानी अखबार डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को कराची प्रेस क्लब में ज्वाइंट ऐक्शन कमिटी के सदस्यों की एक बैठक हुई, जिसमें उन्होंने अपने परिवार वालों और रिश्तेदारों को जबरन अपहरण किए जाने पर चिंता जताई और आरोप लगाया कि इसको लेकर पाकिस्तान की इमरान खान सरकार और संबंधित सरकारी संस्थाएं उनकी बरामदगी को लेकर जरा भी गंभीर नहीं हैं। जेएसी के लोगों ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में ये आरोप लगाए हैं। इस संस्था का कहना है कि पाकिस्तान की सरकार इसको लेकर कोरा भरोसा ही देती रही है, लेकिन जबरिया लापता किए गए लोगों का कुछ भी पता नहीं लगा पा रही है।

लोगों को अगवा किया जाता है और फिर वो नहीं मिलते हैं

लोगों को अगवा किया जाता है और फिर वो नहीं मिलते हैं

जबरिया गुमशदगी का मामला पाकिस्तान के मानवाधिकार के इतिहास में हमेशा से काले धब्बे की तरह रहा है। वहां की लगभग हर सरकारों ने इस परंपरा को अपराध घोषित करने का सिर्फ वादा ही किया है, लेकिन जब कानून बनाने की बात आती है तो उनका रवैया बहुत ही ढीला पड़ जाता है। इसका नतीजा ये होता है कि लोगों को जानबूझकर उनकी आवाज को कुचलने के लिए जबरिया गायब कर दिया जाता है और जो लोग इस अत्याचार में शामिल होते हैं, उनका खुल्लम-खुल्ला राज चलता रहता है और सरकारें उन्हें परोक्ष या सीधे समर्थन देती रहती हैं। इसके पीछे की बड़ी वजह ये भी है कि पाकिस्तानी सरकारों ने वहां के अल्पसंख्यक समुदायों को कुचलने और उनकी जुबान बंद करने के लिए इसे ही अपने एक ठोस हठकंडे की तरह अपना रखा है।

अगर लोग रिहा नहीं कराए गए तो 2 अप्रैल से प्रदर्शन

अगर लोग रिहा नहीं कराए गए तो 2 अप्रैल से प्रदर्शन

पाकिस्तान में जबरन अगवा किए गए ज्यादातर अल्पसंख्यकों की या तो हत्या कर दी जाती है और जो लोग बच जाते हैं उनमें से बहुतों को सेना के गोपनीय टॉर्चर सेल में अमानवीयता झेलने के लिए हमेशा के लिए डाल दिया जाता है। जेएसी के एक सदस्य के मुताबिक, 'कोरोना वायरस महामारी की वजह से हमारी चिंताएं और बढ़ गई हैं। लापता लोगों की बरामदगी को लेकर हमारा धैर्य अब जवाब दे रहा है। अगर हमारे हवारे युवाओं को इस महीने के अंत तक बरामद नहीं किया जाता है तो जबरिया अगवा किए गए लोगों के परिवार वाले 2 अप्रैल से पूरे देश में प्रदर्शन शुरू कर देंगे।' इस संगठन ने इमरान सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि उनके परिवार के गायब लोगों को तबतक बरामद करे।

भारत ने मानवाधिकार परिषद में उठाया है मामला

भारत ने मानवाधिकार परिषद में उठाया है मामला

गौरतलब है कि सोमवार को ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद से कहा है कि वहां पर अपने ही लोगों पर राज्य-प्रायोजित मानवाधिकारों के घोर उल्लंघनों के लिए पाकिस्तान की जिम्मेदारी तय की जाए। परिषद के 46वें सत्र में जवाब देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए भारत ने कहा कि पाकिस्तान दूसरों को उपदेश देने की जगह अपने लाखों लोगों के उत्पीड़न को रोकने के लिए काम करे। जिनेवा स्थित भारत के परमानेंट मिशन के फर्स्ट सेक्रेटरी पवन कुमार बाधे ने इस बात पर जोर दिया कि वहां राजनीतिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें आतंक-विरोधी काले कानूनों के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है। अपने दावे के लिए उन्होंने पाकिस्तानी महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल का नाम लिया, जिन्होंने महिलाओं के खिलाफ हिंसा और जबरिया अपरहण को लकर अभियान चलाया था। उन्हें वहां इतना प्रताड़ित किया गया कि वह देश छोड़कर भाग गईं और उसके बाद उनके पिता मुहम्मद इस्माइल को पाकिस्तानी सरकार ने निशाना बनाना शुरू कर दिया। (तस्वीरें- फाइल और सांकेतिक)

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