दिल्ली चुनाव: सत्ता की संकट से उबरने के लिये सबकी नजरें उपराज्यपाल पर

भाजपा की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने एक सीट जीती है। कांग्रेस ने आठ सीटों पर जीत दर्ज कराई है और जनता दल (युनाइटेड) ने एक सीट जीती है और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज कराई है। किसी पार्टी को सरकार बनाने के लिए साधारण बहुमत हेतु 70 सदस्यीय विधानसभा में 36 सीटों की जरूरत होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि परंपरा के अनुसार, त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भाजपा सरकार बनाने से इंकार कर देती है तो उपराज्यपाल आप को आमंत्रित कर सकते हैं। यदि कोई भी पार्टी सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं होती है तो उपराज्यपाल अपनी रपट राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास भेजेंगे।
दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव एस.के. खन्ना ने कहा, "विधानसभा या तो निलंबित रखी जा सकती है या फिर भंग की जा सकती है। निलंबित विधानसभा की स्थिति में किसी भी पार्टी के लिए बहुमत हासिल करने या कोई गठबंधन बनाने तथा सरकार बनाने का दावा पेश करने का मौका रहता है।
दिल्ली में यदि राष्ट्रपति शासन लागू होता है तो अगले छह महीने के लिए सारे अधिकार उपराज्यपाल के पास आ जाएंगे, जबतक कि कोई नई सरकार नहीं बन जाती या फिर से चुनाव नहीं हो जाता। विधानसभा यदि भंग होती है तो अगले लोकसभा चुनाव के साथ ही यहां फिर से चुनाव कराए जा सकते हैं।












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