अटल-आडवाणी के चित्रों की भाजपा के बैनरों से विदाई
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। भाजपा में हो रहे बदलाव को महसूस करें। एक दौर में या यह कहें कि पिछले लोकसभा चुनाव तक में भाजपा के सभी बैनरों और पोस्टरों में अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के चित्र अवश्य होते थे। कभी -कभी तो बैनरों में श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीन दयाल उपाध्याय जैसे पार्टी के नायकों के भी चित्र देखने में आ जाते थे बैनरों और पोस्टरों में।

मोदी-शाह के चित्र
पर रविवार को पार्टी की अभिनंदन रैली में लगे बैनरों और पोस्टरों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के ही चित्र थे। अटल या आडवाणी के चित्रों के लिए कोई जगह नहीं थी। बाकी नेताओं की तो बात ही छोड़िए।
सफलता दिलाई
जानकार कहते हैं कि वक्त का प्रवाह सब कुछ बदल देता है। अटल-आडवाणी के चित्रों का भाजपा के बैनरों और पोस्टरों से गायब होना इसी रूप में देखा जाना चाहिए। दूसरी बात यह है कि मोदी और शाह की जोड़ी ने भाजपा को सत्ता के शिखर पर लाकर खड़ा कर दिया है। इन दोनों के नेतृत्व में भाजपा को जिस तरह की सफलता मिल ही है, वैसी कभी नहीं मिली। जाहिर है, इसलिए इनके चित्र तो पोस्टरों और बैनरों में जगह बना ही लेंगे।
इंदिरा गांधी के चित्र
वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सौरभ कहते हैं कि हर पार्टी बदलाव के दौर से गुजरती है। भाजपा के पोस्टरों और बैनरों में अब इंदिरा गांधी के चित्र नहीं दिखते। इसी प्रकार से भाजपा के पोस्टोरं और बैनरों में बदलाव हो रहा है। इसलिए इसमें कुछ भी गलत या असामान्य नहीं है।
नई पीढ़ी की पसंद मोदी
भाजपा के एक नेता ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि देश की नई पीढ़ी अपने को नरेन्द्र मोदी और अमित शाह से जोड़कर देखती है। इस पीढ़ी को दीन दयाल उपाध्याय या श्यामा प्रसाद मुखर्जी से कोई लेना-देना नहीं है। ये तो अटल-आडवाणी से भी अपने को नहीं जोड़ पाती।
बहरहाल, बहुत से लोगों को इस बात पर भी हैरानी हो रही है अभिनंदन रैली में आडवाणी जी नहीं आए। वे दिल्ली की राजनीति को बीते 50 सालों से जानते हैं। कायदे से उन्हें बुलाया जाना चाहिए था रैली में।












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