कश्मीर में सेना तैनात करना, कश्मीरियों के मानवाधिकारों का हनन है: प्रशांत भूषण

यह ध्यान देने योग्य है कि सन 2011 में भी प्रशांत भूषण ने भारत से कश्मीर के अलग होने पर वहां के निवासियों की राय लेने की बात कही थी। भूषण के अनुसार कश्मीर की जनता की राय लेनी चाहिए कि वह अपनी सुरक्षा के लिए सेना की मदद चाहती है कि नहीं, जनता की इच्छा के विरूद्ध राज्य में सेना लगा देना 'अलोकतांत्रिक' है। भारत सरकार कश्मीरियों के मानवाधिकारों का हनन कर रही है।
भूषण ने यह भी कहा था कि अगर कश्मीरी भारत से अलग होना चाहते हैं तो इस मसले का हल संवैधानिक तरीके से निकाला जाना चाहिए। भूषण का मानना है कि कश्मीर में रहने वाले लोग खुद को मुख्यधारा से अलग पाते हैं अत: भारत सरकार को वहां के लोगों का दिल जीतना होगा, अनावश्यक रूप से वहां सेना नहीं तैनात की जानी चाहिए।
प्रशांत भूषण के कथन का भाजपा प्रवक्ता सिद्धार्थ सिंह ने विरोध किया है और कहा कि कश्मीर से सेना हटाने की मांग तो अलगाववादी करते हैं। उनके बयान से लगता है कि वह अलगाववादियों का समर्थन कर रहे हैं। घाटी से जब तक पाक समर्थित आतंकवाद का खात्मा नहीं हो जाता, वहां से सेना नहीं हटानी चाहिए। पूर्व आर्मी चीफ वी पी मलिक ने कहा कि भूषण के इस कथन से 'आप' के समर्थकों को धक्का लगा है।
अपने बयान पर निंदा होते देख प्रशांत ने कहा कि उनके बयान को गलत ढंग से पेश किया गया है।












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