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मिलिए उन 7 युवाओं से जिन्होंने छोड़ दी IPS की नौकरी, जानिए अब क्या कर रहे हैं ये सभी?

नई दिल्ली, 22 सितम्बर। कंधे पर सितारे। माथे पर अशोक स्तंभ। खाकी वर्दी का रुतबा। सलाम ठोकते पुलिसकर्मी और क्षेत्र में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी। ये सब यूं ही नहीं मिलता। इसके लिए कड़ी मेहनत कर आईपीएस बनना पड़ता है। आईपीएस बनने के लिए देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक यूपीएससी की सीएसई पास करना जरूरी है।

अब हर कोई कर रहा गर्व

अब हर कोई कर रहा गर्व

सोचो, अगर कोई आईपीएस बन जाए और फिर वह पुलिस की यह नौकरी छोड़ दे। एक बारगी तो आप भी उस शख्स के इस फैसले को गलत बताते दिखोगे, मगर सच्चाई जानकर आप भी गर्व करते नजर आओगे। आज हम आपको ऐसे ही 7 युवाओं से मिलवा रहे हैं जिन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में लगी लगाई नौकरी छोड़ दी।

 इनका ख्वाब था आईएएस बनना

इनका ख्वाब था आईएएस बनना

समीर सौरभ, गरिमा सिंह, सिद्धार्थ सिहाग, ​गरिमा अग्रवाल, मुदित जैन, निधि बंसल और नम्रता जैन। ये उन 7 युवाओं के नाम हैं जिनका IPS के रूप में चयन हुआ था, मगर इनका ख्वाब था IAS बनना। यही वजह है कि ये मौका मिलने के बावजूद आईपीएस नहीं बने। आईएएस बनकर ही माने। वर्तमान में ये बतौर आईएएस अफसर सेवाएं दे रहे हैं।

 समीर सौरभ पूर्णिया बिहार : पहले प्रयास में बने IPS, दूसरे में IAS

समीर सौरभ पूर्णिया बिहार : पहले प्रयास में बने IPS, दूसरे में IAS

आईएएस समीर सौरभ मूलरूप से बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले हैं। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद इन्होंने आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। 2017 में पहले प्रयास में 142वीं रैंक के साथ यूपीएससी परीक्षा क्रैक कर डाली और आईपीएस बने। हैदराबाद स्थित एसवीपीएनपीए में आईपीएस की ट्रेनिंग भी शुरू कर दी थी। इस दौरान यूपीएससी की तैयारी भी जारी रखी और साल 2018 में दूसरे प्रयास में 32वीं रैंक प्राप्त कर आईएएस बने गए। ट्विटर प्रोफाइल के अनुसार आईएएस समीर सौरभ ​बिहार के डेहरी में बतौर एसडीएम कार्यरत हैं।

गरिमा सिंह बलिया यूपी : आईपीएस बनकर इंजीनियर से की शादी, फिर बनीं आईएएस

गरिमा सिंह बलिया यूपी : आईपीएस बनकर इंजीनियर से की शादी, फिर बनीं आईएएस

मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के गांव कथौली की रहने वाली गरिमा सिंह कभी डॉक्टर बनने का सपना देखा करती थीं। शायद इसी वजह से दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफन कॉलेज से बीए और एमए (हिस्ट्री) के बाद एमबीबीएस किया। अपने पिता के ख्वाब को पूरा करने के लिए गरिमा सिंह ने साल 2012 में यूपीएससी में भाग्य आजमाया। पहले ही प्रयास में आईपीएस बन गईं। यूपी कैडर मिला। लखनऊ में ट्रेनी एएसपी व झांसी में सिटी एसपी के पद पर सेवाएं भी दी। आईपीएस बनने के बाद इंजीनियर से शादी की। शादी के बाद भी यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और साल 2016 में फिर परीक्षा दी और इस बार 55वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनीं। झारखंड कैडर मिला।

सिद्धार्थ सिहाग, हिसार हरियाणा : जज और आईपीएस के बाद आईएएस

सिद्धार्थ सिहाग, हिसार हरियाणा : जज और आईपीएस के बाद आईएएस

हरियाणा के हिसार जिले के अग्रोहा उपखंड के गांव सिवान बोलन में 20 जनवरी 1987 को जन्मे सिद्धार्थ सिहाग बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। ये वो शख्स हैं जो जज और आईपीएस की नौकरी छोड़कर राजस्थान कैडर में आईएएस बने हैं। विधि से स्नातक सिद्धार्थ सिहाग साल 2011 में दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा पास कर जज बने थे।

छह माह तक दिल्ली में मेट्रोपोलियन मजिस्ट्रेट के रूप में सेवाएं दी। उसी साल यूपीएसपी परीक्षा 149रैंक से क्रैक कर डाली और आईपीएस बने। साल 2012 में महज 25 साल की उम्र में सिद्धार्थ सिहाग ने 42वीं रैंक के साथ यूपीएससी पास की और आईएएस अधिकारी बन गए। आईएएस बनने के बाद आईपीएस की नौकरी छोड़ दी।

सिद्धार्थ की पत्नी रुकमणि सिहाग आईएएस, भाई जज

सिद्धार्थ की पत्नी रुकमणि सिहाग आईएएस, भाई जज

बता दें कि आईएएस अधिकारी सिद्धार्थ सिहाग की पत्नी रुकमणि सिहाग भी राजस्थान कैडर में आईएएस अधिकारी हैं। सिद्धार्थ के पिता दिलबाग सिंह सिहाग हरियाणा में मुख्य नगर नियोजक पद से रिटायर हो गए हैं। भाई सिद्धांत सिहाग दिल्ली में जज के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। सिद्धार्थ सिहाग व उनकी पत्नी रुकमणि राजस्थान के कई जिलों में डीएम रह चुके हैं।

गरिमा अग्रवाल, खरगोन, मध्य प्रदेश : तीन बार पास की यूपीएससी परीक्षा, अब आईएएस

गरिमा अग्रवाल, खरगोन, मध्य प्रदेश : तीन बार पास की यूपीएससी परीक्षा, अब आईएएस

तीन बार यूपीएससी परीक्षा करने वाली युवती का नाम है गरिमा अग्रवाल। ये पहले भारतीय डाक सेवा के लिए चुनी गई। फिर आईपीएस बनीं और वर्तमान में तेलंगाना कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। मध्य प्रदेश के खरगोन निवासी गरिमा अग्रवाल ने इंजीनियरिंग के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू की। 2013 में यूपीएससी की परीक्षा कर भारतीय डाक सेवा में नौकरी पाने के बाद भी तैयारी जारी रखी। साल 2017 में 241वीं रैंक हासिल कर आईपीएस बनीं और फिर अगले ही साल 2018 में 41वीं रैंक पाकर आईएएस बन गईं। गरिमा वर्तमान में तेलंगाना के यदाद्रि भोंगीर की असिस्टेंट कलेक्टर हैं।

निधि बंसल, मुरैना, मध्य प्रदेश : इंजीनियर से आईपीएस और अब आईएएस

निधि बंसल, मुरैना, मध्य प्रदेश : इंजीनियर से आईपीएस और अब आईएएस

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के कैलारस में 10 दिसम्बर 1990 को जन्मी निधि बंसल पहले इंजीनियर फिर आईपीएस और अब आईएएस अधिकारी के रूप में झारखंड में सेवाएं दे रही हैं। वर्तमान में ग्वालियर शिफ्ट हो चुके गिर्राज बंसल की बेटी निधि ने साल 2011 में एनआईटी त्रिची तमिलनाडू से कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग से बीटेक की डिग्री प्राप्त की। दो साल तक बेंगलुरू की कपंनी में जॉब किया। जॉब छोड़कर दिल्ली आईं और यूपीएससी की तैयारियों में जुट गईं। साल 2016 और 2017 में 226वीं और 229वीं रैंक पाई। दोनों बार आईपीएस बनीं, मगर इन्हें आईएएस बनना था। यह सपना साल 2019 मेंं 23वीं रैंक पाकर पूरा किया। इन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला।

 मुदित जैन, दिल्ली : दो बार बने आईपीएस का मौका छोड़कर आईआरएस बने

मुदित जैन, दिल्ली : दो बार बने आईपीएस का मौका छोड़कर आईआरएस बने

दिल्ली के रहने वाले मुदित जैन की कहानी थोड़ी जुदा है। इन्होंने यूपीएएसी में पांच बार भाग्य आजमाया। साल 2013 में साक्षात्कार तक पहुंचे। साल 2014 में 222वीं व साल 2015 में 207वीं रैंक पाकर IPS बने। 2016 में फिर परीक्षा दी, मगर इस बार प्रारम्भिक परीक्षा में ही फेल हो गए। 2017 में पांचवा प्रयास कर 173वीं रैंक पाकर आईआरएस अधिकारी बने। मुदित जैन के आईपीएस नौकरी छोड़ने की वजह ये है कि आईपीएस की ट्रेनिंग के दौरान घुटनों में इंजरी हो गई थी। जिसके कारण डॉक्टरों ने आईपीएस की बजाय आईएएस व अन्य अधिकारी बनने की सलाह दी। ऐसे में मुदित ने आईपीएस बनने का मौका दो बार छोड़ा।

नम्रता जैन, दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़ : आईपीएस छोड़ आईएएस बनीं, पति आईपीएस चुना

नम्रता जैन, दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़ : आईपीएस छोड़ आईएएस बनीं, पति आईपीएस चुना

2019 बैच की आईएएस अधिकारी नम्रता जैन इन दिनों सुर्खियों में है। हाल ही इन्होंने आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार रखेचा के साथ बेहद सादगी से कोर्ट मैरिज की है। दोनों को ट्रेनिंग के दौरान एक दूसरे से प्यार हुआ था। नम्रता ने भले ही पति आईपीएस चुना है, मगर खुद ने आईपीएस की नौकरी छोड़ दी थी। छत्तीसगढ़ कैडर की आईएएस अधिकारी नम्रता जैन वर्तमान में महासमुंद के सरायपाली में SDM के रूप में सेवाएं दे रही हैं। भिलाई से इंजीनियरिंग करने वाली नम्रता साल 2017 में अपने दूसरे प्रयास में 99वीं रैंक हासिल कर आईपीएस बनीं और फिर 2019 में 12वीं रैंक पाकर आईएएस बन गईं।

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