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मायावती और अखिलेश ने लोकसभा चुनाव के लिए बनाई रणनीति, मायावती पश्चिम और अखिलेश पूर्व में करेंगे फोकस!

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सपा-बसपा ने शनिवार को महागठबंधन का ऐलान कर दिया। मायावती और अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके घोषणा की दोनों पार्टियां 38-38 सीटों पर लोकसभा चुनाव लडे़ंगी। इसके साथ ही माया-अखिलेश ने 2019 चुनाव में भाजपा को शिकस्त देने के लिए रणनीति बनाने पर भी काम शुरू कर दिया है।

 mayawati focus on west and akhilesh yadav on east in uttar pradesh upcoming lok sabha election 2019

इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक खबर के मुताबिक आने वाले लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती अपने कोटे की 38 सीटों में से 17 आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। इसमें ज्यादा सीटें पश्चिमी यूपी की होंगी। वहीं समाजवादी पार्टी पूर्वी उत्तरप्रदेश की अधिकतर सीटों पर चुनाव लड़ेगी। दोनों पार्टियों के नेताओं ने आपस में बैठकर ये निर्णय लिया है।

मायावती 15 साल बाद लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं। आखिरी बार वो अकबरपुर सीट से साल 2004 में चुनाव लड़ी थी और सांसद बनी थी। वो यहां से दो बार सांसद बन चुकी हैं। वहीं समाजवादी पार्टी से अखिलेश सिंह यादव कन्नौज और उनके पिता मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से चुनाव लड़ेंगे।

बीएसपी बुलंदशहर, आगरा, बिजनौर, मेरठ, सहारनपुर, नगीना और अलीगढ़ से चुनाव लड़ सकती हैं वहीं सपा इटावा, लखनऊ, मुरादाबाद, गोरखपुर, इलाहाबाद, कानपुर और आजमगढ़ से प्रत्याशियों को मैदान में उतार सकती है। बागपत और मथुरा सीट आरएलडी प्रमुख अजीत सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी के लिए छोड़ी जाएगी। लेकिन अगर उनका प्रस्ताव ठुकराकर वो कांग्रेस के साथ गठबंधन करती है तो ये महागठबंधन इन दोनों सीटों पर चुनाव लड़ सकता है।

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बहुजन समाज पार्टी ने उन सीटों की पहचान की है, जहां दलित- मुस्लिम वोटर ज्यादा हैं और यादवों के वोटों के ट्रासंफर से जीत हासिल की जा सकती है।वहीं समाजवादी पार्टी ने भी रणनीति के तहत उन सीटों पर फोकस किया है जहां यादव-मुस्लिम वोटर अच्छी खासी तादात में हैं और वहां कुछ वोट दलितों का हैं।

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी साल 2014 और 2019 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी से ज्यादा सफल रही थी। भाजपा ने महागठबंधन होने से पहले ये कहते हुए हमला किया था कि क्या समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता बीएसपी से कम सीटें मिलने पर इस गठबंधन को स्वीकार करेंगे। बीएसपी-सपा नेताओं का कहना है कि बराबर सीटों के बंटवारे से भाजपा के मुंह पर ताला लग गया है।

सपा-बसपा के एक नेता का कहना है कि किस पार्टी को कौन सी सीट मिलेगी वह इस बात पर निर्भर करता है कि साल 2014 और 2009 के लोकसभा चुनाव में कौन सी पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा ने 5 सीटें जीती थीं और 31 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी. वहीं बीएसपी इस चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी लेकिन 33 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी.

इनमें से दो सीटें जिन पर बीएसपी दूसरे नंबर पर रही थी पिछले साल लोकसभा के उपचुनाव में सपा ने जीत हासिल की थी। ये सीटें गोरखपुर और फूलपुर थी। यहां सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के इस्तीफे के बाद उपचुनाव हुए थे।

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