105 किमी साइकिल चलाकर परीक्षा दिलाने लाए पिता, अब आनंद महिंद्रा उठाएंगे बेटे की पढ़ाई का खर्च
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के धार में बेटे को दसवीं के परीक्षा सेंटर पर पहुंचाने के लिए पिता द्वारा रातभर 105 किलोमीटर तक साइकिल चलाने की खबर फिर सुर्खियों है। इस बार वजह ये है कि दिग्गज कारोबारी आनंद महिंद्रा रातभर साइकिल चलाने वाले पिता के मुरीद होकर उसके बेटे की आगे की पढ़ाई का खर्च उठाने को तैयार हुए हैं।
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आनंद महिंद्रा ने ट्वीट लिखी यह बात
इस संबंध में आनंद महिंद्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा कि 'बहादुर पिता को सलाम, जो अपने बच्चे के लिए सुनहरे भविष्य का सपना देखते हैं। ऐसे ही सपने देश को आगे बढ़ाते हैं। हमारी संस्था आशीष की आगे की पढ़ाई का खर्च उठाएगी। आनंद महिंद्रा ने पत्रकारों से गुजारिश की है कि वे इस परिवार से संपर्क करें।
दसवीं की परीक्षा देनी थी आशीष को
बता दें कि मध्य प्रदेश के जिले के गांव बयडीपुरा के रहने वाले शोभाराम के बेटे आशीष की कक्षा 10 में पूरक आ गई थी और पूरक परीक्षा का सेंटर पूरे जिले में केवल धार ही बनाया गया है, जो उनके घर से करीब 105 किलोमीटर दूर है। कोरोना संक्रमण के चलते बसें अभी नहीं चल रही हैं जिसके चलते उनको धार पहुंचने के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा था और न ही गरीबी में वह किसी तरह के साधन का प्रबंध कर सकते थे।

रातभर साइकिल चलाकर सुबह सेंटर पर पहुंचे
आशीष को परीक्षा दिलाना भी जरूरी था, इसलिए पिता अपन बेटे को साइकिल पर बिठाकर रातभर 105 किलोमीटर का सफर तय किया और मंगलवार सुबह परीक्षा सेंटर पर पहुंचे। आशीष के तीन पेपर होने थे। इसलिए वे तीन दिन का राशन भी अपने साथ लेकर आए थे। खबर देशभर के मीडिया की सुर्खियों में रही।
हर किसी ने किया था पिता के जज्बे को सलाम
आशीष के पिता शोभाराम का कहना था कि पैसे और कोई साधन नहीं होने के कारण साइकिल से ही परीक्षा दिलवाने आना पड़ा। इधर, अब आनंद महिंद्रा ने आशीष की पूरी पढ़ाई का खर्च उठाने का जिम्मा लिया है। यह खबर सोशल मीडिया में भी खूब वायरल हुई थी। कई लोगों ने इनके जज्बे को सलाम किया और तारीफ की।

आईपीएस नवनीत सिकेरा ने शेयर की खुद की स्टोरी
उत्तर प्रदेश कैडर के दबंग आईपीएस व मेरठ आईजी नवनीत सिकेरा ने भी आशीष व शोभाराम की स्टोरी अपने फेसबुक पेज पर शेयर की थी। साथ ही सिकेरा भावुक हो गए और अपने पिता को याद करते हुए खुद की भी स्टोरी शेयर करते हुए लिखा कि कभी उनके पिता भी उन्हें इसी तरह साइकिल पर बैठाकर परीक्षा दिलाने के लिए लाए थे।












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