दिल्ली मेयर चुनाव: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मनोनीत सदस्य चुनाव में नहीं जा सकते, अगली सुनवाई 17 फरवरी को
Delhi Mayor election: बीजेपी और आम आदमी पार्टी की खींचतानी के बीच 6 जनवरी, 24 जनवरी और 6 फरवरी को पार्षदों की बैठक हुई लेकिन दिल्ली मेयर चुनाव नहीं हुआ।

दिल्ली में अब दिल्ली नगर निगम (MCD) के मेयर के चुनाव 16 फरवरी को नहीं होंगे। दिल्ली के मेयर के चुनाव को स्थगित कर दिया गया है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई 17 फरवरी को करेगा। एमसीडी मेयर चुनाव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मनोनीत पार्षद वोट नहीं कर सकते और संवैधानिक प्रावधान इस बारे में स्पष्ट हैं। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि नामांकित सदस्य चुनाव में मतदान नहीं कर सकते।
17 फरवरी को AAP मेयर पद के उम्मीदवार शेली ओबेरॉय द्वारा मेयर चुनाव जल्द कराने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी। पीठ ने आम आदमी पार्टी (आप) के दावे की पुष्टि करते हुए कहा, "मनोनीत सदस्य चुनाव में नहीं जा सकते। संवैधानिक प्रावधान बहुत स्पष्ट हैं।"
एलजी की ओर से एएसजी संजय जैन ने कोर्ट को विश्वास दिलाया कि फिलहाल 16 फरवरी को दिल्ली में मेयर चुनाव नहीं होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मनोनीत पार्षदों की वोटिंग समेत अन्य कानूनी सवालों सुनवाई होने के बाद ही चुनाव कराए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी को आप मेयर पद के उम्मीदवार शेली ओबेरॉय की याचिका पर एलजी के कार्यालय, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के प्रोटेम पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा और अन्य से जवाब मांगा था। आम आदमी पार्टी (आप) और बीजेपी के बीच लंबे समय से चली आ रही खींचतान के बीच मेयर चुनने की तीन बार असफल कोशिश हुई है। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी द्वारा 16 फरवरी को मेयर चुनाव कराने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था।
उपराज्यपाल द्वारा मनोनीत 10 एमसीडी सदस्यों को वोट देने की अनुमति दिए जाने के बाद भाजपा और आप के विरोध के कारण 6 और 24 जनवरी और 6 फरवरी को पार्षदों की बैठक में मेयर का चुनाव नहीं हो सका। हंगामे के बाद सदन को स्थगित कर दिया गया था। दिल्ली नगर निगम अधिनियम भी कहता है कि मनोनीत सदस्य, या एल्डरमेन, सदन की बैठकों में मतदान नहीं कर सकते है।
दिसंबर में हुए एमसीडी चुनावों में आम आदमी पार्टी ने 134 वार्डों में जीत हासिल की। बीजेपी ने 104 वार्ड जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया। जबकि कांग्रेस ने नौ सीटें जीतीं।












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