सिर्फ हिंदी या अंग्रेजी में की जाए बात, जीबी पंत अस्पताल ने वापस लिया ये फैसला
सिर्फ हिंदी या अंग्रेजी में की जाए बात, जीबी पंत अस्पताल ने वापस लिया ये फैसला, सफाई में कही ये बात
नई दिल्ली, 06 जून: दिल्ली का सरकारी अस्पताल गोविंद बल्लभ पंत इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (जीआईपीएमईआर) अपने एक फैसले को लेकर विवादों में आ गया है। जीबी पंत अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक द्वारा शनिवार (05 जून) को एक सर्कुलर जारी किया गया था। इस सर्कुलर में लिखा था कि जीआईपीएमईआर में कार्यस्थलों पर संचार के लिए मलयालम भाषा का इस्तेमाल किए जाने के संबंध में एक शिकायत मिली है। इसलिए अब से अस्पताल में बातचीत के लिए हिंदी और अंग्रेजी भाषा का ही सिर्फ प्रयोग करें। ऐसा ना करने वालों कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। हालांकि रविवार (06 जून) को जीबी पंत अस्पताल प्रशासन ने इस फैसले को वापस ले लिया है। संस्थान के चिकित्सा निदेशक डॉ अनिल अग्रवाल ने रविवार को कहा कि गोविंद बल्लभ पंत इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च में नर्सिंग स्टाफ को मलयालम में बात नहीं करने के लिए जारी किया गया सर्कुलर वापस ले लिया गया है।

सफाई में जीबी पंत अस्पताल ने कही ये बात
रविवार की सुबह जीबी पंत अस्पताल के निदेशक डॉ अनिल अग्रवाल ने कहा कि संवाद सिर्फ हिंदी या अंग्रेजी में की जाएगी, इस आदेश वापस ले लिया गया है। डॉ अनिल अग्रवाल बोले, ''आदेश दिल्ली सरकार या अस्पताल प्रशासन से नहीं आया था और मुझे इस बात की जानकारी भी नहीं थी कि इस तरह का कोई आदेश जारी किया गया है। ऐसा लगता है कि यह नर्सिंग स्टाफ के भीतर एक आंतरिक संचार रहा है। तत्काल कार्रवाई इस मुद्दे को ठीक करने के लिए है, लेकिन जो जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ जांच की जाएगी। एक शिकायत मिली थी। लेकिन यह उनके लिए अपनी भाषा में बातचीत करने का मौलिक अधिकार है और इस तरह का आदेश नहीं हो सकता है।''
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'केवल हिंदी या अंग्रेजी का उपयोग करें, नहीं तो कार्रवाई की जाएगी'
दिल्ली सरकार के जीबी पंत अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक द्वारा शनिवार (05 जून) को जारी एक आदेश में कहा गया था, ''जीआईपीएमईआर में कार्यस्थलों पर संचार के लिए मलयालम भाषा का इस्तेमाल किए जाने के संबंध में एक शिकायत मिली है। जबकि अधिकांश रोगी और सहकर्मी इस भाषा को नहीं जानते हैं और असहाय महसूस करते हैं जिससे बहुत असुविधा होती है। इसलिए सभी नर्सिंग स्टाफों को निर्देश दिया जाता है कि संचार के लिए केवल हिंदी और अंग्रेजी भाषा का ही उपयोग करें अन्यथा गंभीर कार्रवाई की जाएगी।''

इस फैसले का राहुल गांधी, शशि थरूर ने किया विरोध
कांग्रेस के नेताओं ने जीबी पंत के सर्कुलर पर नाराजगी जताई थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्विटर पर कहा था, "मलयालम किसी भी अन्य भारतीय भाषा की तरह ही भारतीय है। भाषा का भेदभाव बंद करो!"
राजस्थान से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद के सी वेणुगोपाल ने भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को पत्र लिखकर सर्कुलर को वापस लेने के लिए लिखा था। उन्होंने लिखा था, ''यह अत्यधिक भेदभावपूर्ण और हमारे संविधान के बुनियादी मौलिक अधिकारों के खिलाफ है"।
तिरुवनंतपुरम के कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी ट्वीट किया था, उन्होंने कहा था, ''यह निर्देश दिमाग को चकरा देता है कि लोकतांत्रिक भारत में एक सरकारी संस्थान अपनी नर्सों को अपनी मातृभाषा में उन लोगों से बात नहीं करने के लिए कह सकता है जो उन्हें समझते हैं। यह अस्वीकार्य, असभ्य, आपत्तिजनक और भारतीय नागरिकों के बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन है।"

नर्सों ने माफी मांगने की मांग
इस पूरे मामले पर अब नर्सों ने निर्देश जारी करने वाले अधिकारियों से लिखित में माफी मांगने की मांग की है। एएनआई से बात करते हुए दिल्ली में मलयाली नर्स यूनियनों ने कहा, "यह वास्तव में हमारे लिए चौंकाने वाला था। हमें लगता है कि यह हमारी भाषाई स्वतंत्रता के लिए खतरा है। हमें संबंधित व्यक्ति से माफी की मांग करते हैं क्योंकि उन्होंने पूरे राज्य को अपमानित किया है।''












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