सात साल बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म व हत्या के दोषी को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा
सात साल बच्ची की अपहरण के बाद दुष्कर्म व हत्या के दोषी को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा
नई दिल्ली, 24 जून। सात साल की दिव्यांग बच्ची का अपहरण करके दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। दोषी के लिए सजा का ऐलान किया है। उसे सजा ए मौत सुनाई गई है। मामला राजस्थान का है।

बता दें कि राजस्थान में साल 2013 में शारीरिक और मानसिक रूप से दिव्यांग साढ़े सात साल की बच्ची का अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद उसके साथ रेप किया और फिर हत्या कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान दोषी को सजा सुनाई है।
सुप्रीम कोर्ट ने सजा सुनाते समय इसे क्रूर अपराध व अमानवीय बताया। कोर्ट ने दोषी को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखते हुए शुक्रवार को कहा कि यह अपराध अत्यंत निंदनीय है और अंतरात्मा को झकझोर देने वाला है।
न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की तीन सदस्यीय पीठ ने मृत्युदंड दिए जाने के राजस्थान उच्च न्यायालय के 29 मई, 2015 के आदेश को बरकरार रखा है।
पीठ ने कहा कि खासकर, जब पीड़िता (मानसिक रूप से अस्वस्थ और दिव्यांग साढ़े सात साल की बच्ची) को देखा जाए, जिस तरह से पीड़िता का सिर कुचल दिया गया, जिसके कारण उसके सिर की आगे की हड्डी टूट गई और उसे कई चोटें आईं, उसे देखते हुए यह अपराध अत्यंत निंदनीय और अंतरात्मा को झकझोर देता है।'
उच्च न्यायालय ने कहा था कि यह मामला अत्यंत दुर्लभ मामलों की श्रेणी में आता है और उसने सत्र अदालत द्वारा इस मामले में पारित आदेश को बरकरार रखा था। उसने कहा था कि सत्र अदालत के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है। अपराधी ने 17 जनवरी, 2013 को बच्ची का अपहरण किया था, उसका बलात्कार किया था और उसकी हत्या कर दी थी।












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