1 साल केजरीवाल सरकार, उठे ये 10 सवाल
नयी दिल्ली। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने आज एक साल पूरे कर लिए हैं। एक साल में केजरीवाल सरकार ने क्या कामयाबी हासिल की और क्या-क्या खामियां उन्हें आलोचनाओं के केंद्र में ले आई ये जानना बेहद दिलचस्प होगा। चुनौतियां भले ही बहुत रही हो लेकिन लोगों ने मान लिया कि अरविंद केजरीवाल राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी बन चुके हैं। जानें कैसे किया था केजरीवाल ने प्यार का इजहार?
इस मामले में अब उन्हें आप सीखने वाला नहीं कह सकते। जिसे कभी भाजपा की बी-टीम कहा जाता था वो आज कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। लेकिन दिल्ली की सत्ता में आने के बाद से उनकी खामियां भी उनका पीछा नहीं छोड़ पाई। कभी अपने तानाशाही रवैये तो कभी पार्टी के भ्रष्टाचार का मुद्दा हमेशा से उनके लिए बड़ी मुश्किलें खड़ा करता रहा। आगे पढ़िए कौन बना केजरीवाल का सिर दर्द...

जनलोकपाल
केजरीवाल सरकार की सबसे बड़ी नाकामी जनलोकपाल बिल। जिस बिल का राग आलाप कर आम आदमी पार्टी सत्ता में आई थी वो आज उस बिल को भूल चुकी है।

छूट गए पुराने साथी
योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण की बात इस पार्टी की सबसे पड़ी पूंजी हुआ करती थी। वे लोग अब इस पार्टी में नहीं हैं। उन्हें हटा कर पार्टी में तानाशाही क़ायम कर दी गई।

महिला सुरक्षा में फेल
दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा बड़ा मुद्दा रहा है। आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले वादा किया था कि वो दिल्ली की सुरक्षित बनाएगी, लेकिन इस मामले में आप सरकार पूरी तरह फेल हो गई।

तानाशाही
केजरीवाल के स्वभाव में तानाशाही शुरू से ही रही है, लेकिन पार्टी और पार्टी नेताओं को लेकर उनके किए फैसले ने उनके इस तानाशाही प्रवृत्ति में बढ़ोतरी कर दी।

दिल्ली पुलिस से पंगा
केंद्र के बहाने आम आदमी पार्टी दिल्ली पुलिस और उपराज्यपाल नजीब जंग पर अपनी नाराजगी जताती रही है। दिल्ली पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से असंतुष्ट केजरीवाल सरकार ने पुलिस कमिश्नर और उपराज्यपाल नजीब जंग दोनों को बीजेपी का एजेंट करार दिया।

मंत्रियों की वजह से शर्मिंदगी
केजरीवाल सरकार को सबसे ज्यादा शर्मिंदगी उठानी पड़ी अपने ही कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर पर ग्रेजुएशन और कानून की फर्जी डिग्री के आरोप लगने से। इसके चलते ना केवल तोमर की मंत्री की कुर्सी गई बल्कि उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ी।

आरोपों में पार्टी नेता
आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक कमांडो सुरिंदर सिंह भी आरोपों में घिरे। आरोप तो चुनाव में पार्टी उम्मीदवार नरेश बालियान पर चुनाव के दौरान अवैध शराब बांटने के भी लगे। पार्टी नेता कुमार विश्वास पर एक महिला ने सनसनीखेज आरोप लगाऐ, जिसमें विश्वास को हाल ही में दिल्ली पुलिस से क्लीन चिट मिल गई है।

गजेंद्र की खुदकुशी
22 अप्रैल को दिल्ली के जंतर मंतर पर आप ने भूमि अधिग्रहण बिल का विरोध करने के लिए रैली बुलाई, लेकिन इसमें राजस्थान से आये किसान गजेन्द्र ने खुद को फांसी लगा ली। यह त्रासदी राजनीतिक टकराव का मामला बन गई। गजेंद्र की खुदकुशी को फिर केजरीवाल सरकार ने शहादत में बदलने की कोशिश की। जिसे लेकर खूब विवाद हुआ।

सोमनाथ भारती विवाद
आम आदमी पार्टी के पूर्व कानून मंत्री और नेता सोमनाथ भारती पर उनकी पत्नी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। इस मामले के बाद सोमनाथ भारती का भयानक चेहरा सामने आ गया और आम आदमी पार्टी की किरकिरी हुई।

महिला आयोग से झंझट
कांग्रेस की बरखा सिंह के महिला आयोग के अध्यक्ष रहते हुऐ केजरीवाल सरकार और दिल्ली महिला आयोग के बीच तनातनी की खबरें सुर्खियां बटोरती रहीं।












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