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नरसिंहपुर हादसा: वाटरफॉल में तीन दोस्तों की कैसे हुई मौत, पिकनिक का प्लान बना त्रासदी, जानिए पूरा मामला

MP News: मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में एक दिल दहलाने वाला हादसा सामने आया, जहां शुक्रवार, 1 अगस्त 2025 को हाथीनाला-बिलधा वाटरफॉल में नहाने गए तीन 12वीं कक्षा के छात्रों की डूबने से मौत हो गई।

मृतकों की पहचान तन्मय शर्मा, अश्विन जाट, और अक्षत सोनी के रूप में हुई है। ये तीनों दोस्त स्कूल की छुट्टी के बाद पिकनिक मनाने वाटरफॉल पहुंचे थे, लेकिन यह मौज-मस्ती की सैर एक भयानक त्रासदी में बदल गई।

Narsinghpur accident Three friends drowned in waterfall picnic plan turned into tragedy know more

हादसे का घटनाक्रम: स्कूल से वाटरफॉल तक

नरसिंहपुर जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर, जबलपुर-भोपाल राजमार्ग पर बिलधा गांव के पास जंगल में स्थित हाथीनाला-बिलधा वाटरफॉल एक खूबसूरत लेकिन खतरनाक मानसूनी स्थल है। तन्मय शर्मा (संस्कार सिटी), अश्विन जाट (धुवघट), और अक्षत सोनी (गोकुल नगर) शुक्रवार सुबह स्कूल जाने के लिए घर से निकले थे। तन्मय चावरा विद्यापीठ में 12वीं का छात्र था, जबकि अश्विन और अक्षत उत्कृष्ट विद्यालय में पढ़ते थे।

उत्कृष्ट विद्यालय के प्रिंसिपल एस. पटेल ने बताया, "शुक्रवार को स्कूल में पर्यटन क्विज कॉन्टेस्ट था, जिसमें 160 बच्चों ने हिस्सा लिया। इस कारण स्टाफ व्यस्त था, और स्कूल की छुट्टी घोषित कर दी गई थी। गुरुवार को ही बच्चों और अभिभावकों को इसकी सूचना दे दी गई थी।" संभवतः तीनों दोस्तों ने छुट्टी का फायदा उठाकर वाटरफॉल जाने का प्लान बनाया।

तीनों छात्र दो वाहनों-एक स्कूटर और एक मोटरसाइकिल-पर सवार होकर वाटरफॉल पहुंचे। सुआतला थाना प्रभारी बी.एल. त्यागी ने बताया, "शाम 6 बजे परिजनों ने सूचना दी कि बच्चे घर नहीं लौटे। उनकी स्कूटी में जीपीएस सिस्टम था, जिसके जरिए हमें वाटरफॉल के पास उनकी लोकेशन मिली। वहां पहुंचने पर एक बच्चे की स्कूल यूनिफॉर्म, बैग, और तीनों के कपड़े मिले।"

रेस्क्यू ऑपरेशन: देर रात तक चली सर्चिंग

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, होमगार्ड, और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं। @jantaserishta.com ने 2 अगस्त 2025 को बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन शाम 6 बजे शुरू हुआ और रात 11 बजे तक चला। वाटरफॉल की गहराई 50-60 फीट थी, और 30 फीट ऊंचाई से पानी गिर रहा था, जिसने बचाव कार्य को चुनौतीपूर्ण बना दिया।

टीआई बी.एल. त्यागी ने कहा, "रस्सियों के सहारे पहले तन्मय शर्मा का शव निकाला गया। इसके बाद रात 12 बजे तक अश्विन जाट और अक्षत सोनी के शव भी बरामद किए गए।" शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया और बाद में परिजनों को सौंप दिया गया। नरसिंहपुर की पुलिस अधीक्षक मृगाकी डेका ने बताया, "साथी छात्रों ने बताया कि तीनों ने वाटरफॉल पर जाने की योजना बनाई थी। हमने MERG (मृत्यु जांच रपट) दर्ज की है और मामले की जांच जारी है।"

प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

हाथीनाला-बिलधा वाटरफॉल पर कोई सुरक्षा इंतजाम या चेतावनी बोर्ड नहीं थे, जिसने इस हादसे को और गंभीर बना दिया। "यहां सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। कई बार लापरवाही और असामाजिक गतिविधियों की वजह से हादसे होते रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया।"

स्थानीय निवासी रामेश्वर ठाकुर ने कहा, "वाटरफॉल मानसून में खतरनाक हो जाता है। हर साल युवा यहां नहाने आते हैं, लेकिन प्रशासन ने न तो गार्ड लगाए, न ही चेतावनी बोर्ड।" इस हादसे ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल खड़े किए हैं। मेरी विधानसभा में गत दिवस बिल्धा वॉटरफॉल में डूबने से तीन नौजवानों की दुखद मृत्यु।" उन्होंने इस हादसे पर गहरा दुख जताया।

मध्य प्रदेश में डूबने की अन्य घटनाएं

मध्य प्रदेश में वाटरफॉल और नदियों में डूबने की घटनाएं नई नहीं हैं। सीहोर जिले के भेरूखो वाटरफॉल में दो VIT छात्र, हेमंत राव और सिनमुक, सेल्फी लेते समय डूब गए। 16 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उनके शव बरामद हुए। इसी तरह, जबलपुर में नर्मदा नदी में दो पुलिसकर्मियों के बेटों, सुमित दुबे और बृजेंद्र मरकाम, की डूबने से मौत हो गई। ये घटनाएं खतरनाक जलस्रोतों पर सुरक्षा की कमी को उजागर करती हैं।

यह हादसा कई सवाल खड़े करता है:

सुरक्षा की कमी: वाटरफॉल जैसे खतरनाक स्थानों पर चेतावनी बोर्ड और गार्ड क्यों नहीं हैं?

प्रशासनिक जवाबदेही: क्या प्रशासन अब ऐसे स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाएगा?

जागरूकता: क्या स्कूलों और अभिभावकों को बच्चों को ऐसे खतरों के प्रति जागरूक करना चाहिए?

नरसिंहपुर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वह भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाएगा। प्रशासन को वाटरफॉल जैसे स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, गार्ड, और रस्सियों की व्यवस्था करनी चाहिए।

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