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यस बैंक घोटाला: राणा कपूर की पत्नी और बेटियों की जमानत याचिका को बॉम्बे हाईकोर्ट ने किया खारिज

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर की पत्नी, बिंदू कपूर और बेटियों, रोशनी और राधा कपूर द्वारा डीएचएफएल से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

मुंबई, 28 सितंबर। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर की पत्नी, बिंदू कपूर और बेटियों, रोशनी और राधा कपूर द्वारा दीवान हाउसिंग फाइनेंशियल लिमिटेड (डीएचएफएल) से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में जमानत याचिका को खारिज कर दिया। बता दें कि न्यायमूर्ति भारती डांगरे 24 सितंबर, 2021 को याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज उन्होंने इस याचिका पर अपना फैसला सुनाया।

Bombay High Court

27 पन्नों के आदेश में न्यायमूर्ति डांगरे ने कहा कि याचिकाकर्ताओं पर कथित रूप से अपराध करने का आरोप लगाया गया है, जिसके चलते राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य के साथ-साथ जनता को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि इस तरह के अपराध दिन ब दिन बढ़ रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप देश के समग्र विकास में रुकावट आई है और इससे देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है।

अपराध को अधिक जघन्य बताते हुए कोर्ट ने कहा कि इससे देश के आर्थिक ताने-बाने को नुकसान हुआ है और इससे कानून और व्यवस्था में जनता का भरोसा उठा है। बता दें कि याचिकाकर्ताओं ने मुंबई की विशेष अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसने न केवल उन्हें जमानत देने से इंकार किया था, बल्कि उन्हें 23 सितंबर, 2021 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था और इस हिरासत को 1 अक्टूबर, 2021 तक बढ़ा दिया गया था।

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याचिकाकर्ताओं ने विशेष अदालत के आदेश को खारिज करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और अमित देसाई ने तर्क दिया कि याचिाकर्ताओं को जांच के दौरान इसलिए गिरफ्तार नहीं किया गया क्योंकि उन्होंने सीबीआई की जांच में पूरा सहयोग किया, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि बतौर महिला वे एक उदार दृष्टिकोण की हकदार हैं। उन्होंने एक अन्य तर्क देते हुए कहा कि जांच एजेंसियों के हितों की रक्षा के लिए प्रवर्तन निदेशालय ने उनकी 600 करोड़ की संपत्ति और बैंक खाते सीज कर दिए। वहीं, सीबीआई की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने कोर्ट के फैसले को उचित ठहराया और काह कि अपराध की जघन्यता को देखते हुए तीनों महिलाएं किसी भी सहानुभूति की पात्र नहीं हैं।

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