नासिक हादसा- मात्र 21 दिनों के उपयोग के बाद कैसे लीक हो गया ऑक्सीजन टैंक, आखिर कौन लेगा हादसे की जिम्मेदारी
महाराष्ट्र के नासिक स्थित जाकिर हुसैन अस्पताल में बुधवार को ऑक्सीजन लीक होने के कारण 24 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। सभी 24 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित थे।
मुंबई, 22 अप्रैल। महाराष्ट्र के नासिक स्थित जाकिर हुसैन अस्पताल में बुधवार को ऑक्सीजन लीक होने के कारण 24 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। सभी 24 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित थे। नासिक में हुए इस दर्दनाक हादसे के पीछे भारी लापरवाही की बात सामने आई है। पुलिस ने अपनी शुरुआती जांच में ऑक्सीजन की रीफिलिंग के दौरान लापरवाही की बात कही है, जिसमें 24 लोग मर गए।
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खबरों के मुताबिक 13 किलो का जो तरल ऑक्सीजन टैंक लीक हुआ वह पिछले 21 दिनों से उपयोग में था, जिसके वाल्व में खराबी के कारण ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो गई और इसके परिणामस्वरूप 24 लोग बेमौत मारे गए। आपको बता दें कि नासिक नगर निगम ने ताइयो निप्पॉन सेंसो प्राइवेट लिमिटेड को शहर में चल रहे 2 कोविड केयर केंद्रों को किराए पर ऑक्सीजन टैंक्स मुहैया कराने का ठेका दिया था, जिसके तहत नासिक नगर निगम ने कंपनी को 1.62 करोड़ रुपए टैंक किराये के तौर पर देने के लिए और 2 करोड़ रुपए उन टैंकों को 10 सालों तक टैंक रीफिल करने के लिए दिये थे। इन शर्तों के साथ एक अनुबंध कंपनी को पिछले सितंबर में भेजा गया था।
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हालांकि इस परियोजना पर काम बहुत धीमी गति से चल रहा था और साल 2020 के अंत में कोरोना के मामलों में कमी आने के बाद यह परियोजना लगभग बंद सी हो गई। लेकिन जैसे ही मार्च में कोरोना के मामलों में फिर से तेजी देखने को मिली, भाजपा द्वारा नियंत्रित नासिक नगर निगम ने इस परियोजना पर फिर से ध्यान देना शुरू कर दिया। नासिक में मार्च में प्रति 10 लाख की आबादी पर 46,050 नए कोरोना के मामले दर्ज हुए थे, जोकि पूरे देश में सर्वाधिक थे।परियोजना को लेकर डॉक्टरों और सामाजिक कार्यकर्तायों के बीच तमाम तरह की बहसों के बीच इस परियोजना को 31 मार्च से शुरू कर दिया गया।
इसको लेकर सामाजिक कार्यकर्ता ने सवाल उठाते हुए कहा कि, 'यह जनता के साथ खिलवाड़ है। करार होने के 5 महीने बाद इस सेवा को शुरू किया गया जबकि कोरोना काल में मरीजों के लिए इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है और हैरानी की बात यह है कि यह प्रणाली तीन सप्ताह तक भी ठीक से काम नहीं कर सकी।'
इस हादसे को लेकर नासिक नगर निगम ने सफाई देते हुए कहा कि सेवा के शुरू करने से पहले सिस्टम का तकनीकी मूल्यांकन किया गया था। नगर निगम के अधिकारियों ने कहा, '31 मार्च को सेवा के शुरू होने के बाद कंपनी की एक टीम आई थी और उसने इसका तकनीकी मूल्यांकन किया था। उन्होंने हर चीज को बारी की से जांचा और क्योंकि वह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है इसलिए हमने उसपर भरोसा किया।'
यह पूछे जाने पर कि सेवा के शुरू होने के तीन सप्ताह के अंदर ही सिस्टम कैसे फेल हो गया, नगर निगम आयुक्त कैलाश जाधव ने कहा, 'इसको लेकर जांच जारी है। परिणाम सामने आने पर ही पता चलेगा कि चूक कहां हुई।' उन्होंने कहा कि ताइयो निप्पोन कंपनी ने अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
गौरतलब है कि जाकिर हुसैन अस्पताल को पिछले साल कोविड केयर अस्पताल में तब्दील किया गया था। शहर में 5 अस्पतालों को कोविड केयर अस्पतालों में बदला गया था जिनमें से वर्तमान में 2 चालू थे। पिछले साल महामारी शुरू होने के बाद से 6,000 से अधिक रोगियों का यहां इलाज किया गया है।












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