भारत में 90000 रू. कमाने वाली भी माना जाएगा गरीब
मुंबई। भारत में गरीबों की तादात में कोई कमी नहीं हुई है। यहां के एक भारी तबके को दो दून की रोटी जुटाने के लिए दिन-रात मेहनत करनी होती है। भारत में हर 10 लोगों में से 3 गरीब है, लेकिन अब गरीबी की परिभाषा बदलने जा रही है। बॉम्बे हाई कोर्ट की नजर में वह पारसी गरीब है, जो हर महीने 90 हजार रुपए से कम कमाता है।

यानी 90000 रूपए तक कमाने वाले लोग गरीब नहीं कहलाएंगे। दरअसल बॉम्बे हाईकोर्ट ने पारसी पंचायत के उस मानक को लेकर अपनी सहमति जताई है, जिसके तहत 'गरीब व जरूरतमंद पारसी' को परिभाषित किया गया था।
इसके मुताबिक वहीं पारसी गरीब माना जाएगा जिसकी हर महीने की आमदनी 90 हजार रुपए से कम है या जिसके पास 25 लाख रुपए से कम संपत्ति है। इनके सालाना आय 2013-14 में 74,380 रुपए थी। वहीं रंजराजन समिती के मुताबिक भारत में ग्रामीण इलाकों में हर महीने 816 रुपए से कम और शहर में 1000 रुपए से कम खर्च करने वाला गरीबी रेखा से नीचे माना जाता है।
दरअसल ये बात उस वक्त उटी जब हाईकोर्ट ने पंथकी बाग, अंधेरी की कम्यूनिटी हाउसिंग में फ्लैट न मिलने के खिलाफ दहानू के रहने वाले रोहिंटन तारापोरेवाला की याचिका खारिज कर दी। दरअसल अपनी स्वास्थ का हलावा देकर तारापोरेवाला ने मुंबई में रहने की पेशकश की थी। लेकिन इस पर पंचायत ने अड़ांगा लगाने की कोशिश की। लेकिन सोसाइटी फ्लैट में शादी के बाद रहने की जगह खोजने वालों को प्राथमिकता दी गई थी। ऐसे में उन्हें वहां आवंटन नहीं मिल पाया।
इसके खिलाफ याचिका दायर करने पर अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि तारापोरेवाला की हर महीने की आमदनी 90 हजार रुपए से ऊपर व कुल संपत्ति भी 25 लाख रुपए से ज्यादा थी। और वो फ्लैट लेने के लिए अचित हकदार नहीं है।












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