बागपत में किसका एनकाउंटर करेंगे पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह?

पढ़ें-2014 के शीर्ष उम्मीदवार
बागपत के तहत पांच विधानसभा क्षेत्र बागपत, बड़ौत, मोदीनगर, चपरौली और सिवालखास आते हैं। आपको बता दें कि बागपत से अजित सिंह ने साल 2009 में बीएसपी के उम्मीदवार मुकेश शर्मा, कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार सोमपाल और समाजवादी पार्टी के साहब सिंह को हराया था। अजित सिंह को इन लोकसभा चुनावों में 2,38,638 वोट्स हासिल हुए थे। 10 अप्रैल से ही उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनावों के लिए वोटिंग का आगाज हो जाएगा और बागपत पहले चरण में ही शामिल है।
कौन हैं अजित सिंह
74 वर्षीय अजित सिंह जाटों के नेता माने जाते हैं और उनके पीछे एक मजबूत राजनीतिक इतिहास है। अजित सिंह देश के पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों के नेता करार दिए जाने वाले चौधरी चरण सिंह के बेटे हैं। उन्होंने साल 1999 में राष्ट्रीय लोक दल की स्थापना की थी। फिलहाल वह यूपीए सरकार में केन्द्रिय नागरिक उड्डयन मंत्री का कार्यभार संभाल रहे हैं।
उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग हरित प्रदेश की मांग के साथ ही अपने मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा को भी जाहिर कर दिया था। अजित सिंह ने वर्ष 1988 में जनता पार्टी के अध्यक्ष बने थे। अजित सिंह ने कांग्रेस के साथ ही अपनी पार्टी का विलय किया लेकिन सिर्फ एक माह बाद ही उन्होंने पार्टी छोड़ दी और 1997 में कांग्रेस के उम्मीदवार को शिकस्त दी। उन्होंने अपना पहला लोकसभा चुनाव साल 1989 में जीता था।
1996 में राज्यसभा सांसद के तौर पर वह संसद में मौजूद रहे। अजित सिंह ने छह बार लोकसभा का चुनाव जीता है और वह सिर्फ एक बार साल 1988 में चुनाव हारे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अजित सिंह साल 2001 से ही निर्णायक भूमिका के तौर पर मौजूद रहे हैं। इस साल उन्होंने बीजेपी के साथ करार किया लेकिन बीएसपी सरकार से समर्थन वापस ले लिया जिसे बीजेपी और राष्ट्रीय लोकदल का समर्थन मिल रहा था।
बीएसपी की सरकार गिर गई और फिर मुलायम सिंह यादव की अगुवाई में साल 2002 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी। उस समय भी अजित सिंह ने पार्टी को समर्थन दिया लेकिन साल 2007 में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस सरकार से भी समर्थन वापस ले लिया। अजित सिंह के अलावा अब उनके बेटे जयंत सिंह जो कि मथुरा से सांसद हैं, उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
अजित सिंह आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र रह चुके हैं और पेशे से एक कंप्यूटर इंजीनियर सिंह ने शिकागो के इलिनियॉस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से भी पढ़ाई की है। 1986 में भारतीय राजनीति में शामिल होने वाले सिंह ने 15 साल अमेरिका के शहर शिकागो में बिताए हैं।
कौन हैं सत्यपाल सिंह
बागपत से अपना पहला चुनाव लड़ने जा रहे 58 वर्षीय सत्यपाल सिंह मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त रह चुके हैं और वह 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। सत्यपाल सिंह यूं तो साल 2015 में रिटायर होने वाले थे लेकिन फरवरी में वह मुंबई के पहले ऐसे पुलिस आयुक्त बन गए जिन्होंने समय से पहले ही अपनी पोस्ट से इस्तीफा राजनीति में आने के लिए दे दिया। नवंबर 1955 में मेरठ के बासौली में जन्म लेने वाले सिंह का मकसद कभी पुलिस सर्विस को ज्वॉइन करने का नहीं रहा और वह हमेशा से ही वैज्ञानिक बनना चाहते थे। सिंह केमेस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उन्होंने इसी विषय में एमफिल की पढ़ाई भी की है।
ऑस्ट्रेलिया से एमबीए करने वाले सत्यपाल सिंह के पास पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए और पीएचडी की भी डिग्री है। सत्यपाल सिंह मानते हैं कि बागपत संसदीय क्षेत्र के लोगों खासकर मुसलमानों और जाटों के दिल में मुजफ्फर नगर दंगों को लेकर काफी बुरी भावनाएं हैं। उनकी मानें तो विकास उनका सबसे पहला मुद्दा होगा। सत्यपाल सिंह ने कहा, 'मुझे मुसलमानों से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। हर व्यक्ति को विकास चाहिए। मुझे नहीं पता के लोगों के दिमाग में क्या चल रहा है।
अगर किसी के मन में बिजली, सड़क और उद्योगों के लिए भी उम्मीदें हैं तो मैं उनको भरोसा दिलाता हूं उनको भी फायदा होगा।' अपने चुनावी अभियान में अलीगढ़द मुस्लिम विश्वविद्यालय के कर्इ अध्यापकों का समर्थन सत्यपाल सिंह को हासिल हुआ था। सत्यपाल मानते हैं कि एक अपराधी हमेशा अपराधी ही होता है। उनके मुताबिक वह एक पुलिस अधिकारी रहे हैं और उन्हें चुनौतियां पसंद हैं। उन्हें उम्मीद हैं कि मोदी का जादू इस बार अजित सिंह का जादू खत्म करने में सफल होगा।
कौन हैं सौमेंद्र ढाका
सौमेंद्र ढाका पेशे से एक किसान हैं और उनके पास लॉ की मास्टर डिग्री है। वह साल 2012 से आप पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। ढाका, अरविंद केजरीवाल के स्वराज के ख्याल से काफी प्रभावित हैं और उन्हें उम्मीद हैं कि वह इस हकीकत में बदल पाएंगे।
क्या कहते हैं जानकार
बागपत में अजित सिंह की पकड़ काफी मजबूत है और हो सकता है कि इस बार हवा उनके पक्ष में ही हो। लेकिन पिछले साल हुए मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद जाटों की सोच अजित सिंह के लिए लोकसभा चुनावों में बदल भी सकती है। उधर राजनीति में पहली बार उतरने वाले सत्यपाल सिंह का विनम्र रवैया और लोगों की उनतक आसान पहुंच की वजह से हो सकता है उन्हें लोगों के वोट हासिल हो जाएं। उनके पास पुलिस सर्विस का बेहरीतन रिकॉर्ड है और लोग उन्हें एक मशहूर आईपीएस के तौर पर भी जानते हैं। साफ राजनेता की पसंद के तौर पर बागपत के लोग उन्हें एक मौका दे सकते हैं।












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