Kanha National Park के वन्य प्राणियों पर खतरा!, जानिए NTCA की किस रिपोर्ट ने उड़ाई नींद
Kanha national park: टाइगर समेत एक से बढ़कर एक वन्य प्राणियों के कुनबे वाले मध्य प्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क एक बार फिर उस बड़े खतरे का जिक्र सामने आया, जिसमे कान्हा समेत आसपास का जंगली क्षेत्र शामिल हैं। एनटीसीए द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के बाद फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की भी नींद उड़ गई हैं।
वन्य प्राणियों की दुनिया में कान्हा नेशनल पार्क का समृद्ध इतिहास रहा हैं। स्टेट ऑफ़ टाइगर को-प्रिडेटर एंड प्रे इन इंडिया- 2022 की NTCA ने रिपोर्ट जारी की हैं। जिसमें 2006 से 2014 तक कोर क्षेत्र में सबसे ज्यादा वन्य जीव आबादी वाला पार्क बताया गया, लेकिन मौजूदा आंकड़े कुछ और ही हैं।
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की रिपोर्ट में दावा किया गया कि कान्हा में वन्य प्राणियों की आबादी में कमी की बड़ी वजह वामपंथी उग्रवाद हैं। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट बसंत मिश्र इसे माओवादियों से जोड़कर देखते हैं।

मिश्र कहते है कि मंडला जिले का कान्हा नेशनल पार्क का विस्तार बालाघाट जिले और कुछ हिस्सा सिवनी जिले तक फैला हैं। बालाघाट जिला नक्सल प्रभावित रहा हैं। मौका पाते ही एक्टिव कुछ नक्सली संगठनों का डेर की आहट जब-तब इन्ही जंगलों की ओर होती हैं। जिसका असल वन्य प्राणियों पर पड़ रहा हैं। शिकार की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसके अलावा गोलियों की तड़तड़ाहट में कोर से एरिया से वन्य प्राणी दूसरे जंगलों की तरफ भी कूच कर रहे हैं।
आंकड़ों पर गौर करें तो कान्हा में 105 बाघों का कुनबा पर्यटन की खूबसूरती बढ़ा रहे हैं। टेरिटोरियल वन क्षेत्र में लगभग 83 बाघ हैं। इनमें कान्हा-पेच कॉरिडोर कॉम्पलेक्स में 14, बालाघाट में 49, बरघाट में 8, दक्षिण सिवनी में 12 बाघों की मौजूदगी पाई गई है। कान्हा के भीतर बाघों का घनत्व प्रति 100 वर्ग किलोमीटर में करीब 6 पाया गया है। अन्य वन्य प्राणियों की संख्या में 2018 के मुकाबले कमी दर्ज की गई हैं। कान्हा नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर एसके सिंह ने भी एनटीसीए की रिपोर्ट की पुष्टि की हैं। उनका कहना है कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर हैं और वामपंथी उग्रवाद के मसले पर हर स्तर पर प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।












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