'Mandla में जनआशीर्वाद यात्रा' ग्रीन सिग्नल देने आ रहे अमित शाह, महाकौशल की सियासी सूरत बदलने BJP का बिग प्लान

Amit Shah mandla visit: मध्य प्रदेश में जीत का पंजा लगाने के लिए बीजेपी हर खाने को चित करने पूरी तैयारी से मैदान में हैं। शिवराज सरकार की एक के बाद एक बड़ी घोषणाओं के बीच जन आशीर्वाद यात्रा का चित्रकूट से आगाज भी हो गया। अब दूसरी यात्रा रथ को हरी झंडी दिखाने अमित शाह मंडला आ रहे हैं।

पूरे महाकोशल को साधते हुए मंडला में 5 सितंबर का दिन बीजेपी के बेहद अहम माना जाना रहा हैं। इसलिए भी क्योकि यात्रा के शंखनाद का प्रोग्राम बदलकर अमित शाह को मंडला के लिए चुना गया। सुनने में यह सामान्य प्रक्रिया लग सकती है, लेकिन इसके पीछे बीजेपी के बिग प्लान की वो कड़ी मानी जा रही है, जो पिछले चुनाव में टूट गई थी।

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यही वजह से मौजूदा वक्त में पीएम मोदी के बाद सबसे बड़े ताकतवर चेहरे के रूप में राजनीति के चाणक्य अमित शाह को जनआशीर्वाद यात्रा को आगे बढ़ाने डोर थमाई गई। भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी सुधीर कसार ने बताया कि यात्रा को हरी झंडी दिखाने के पहले शाह यहां के राज राजेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। लगभग दो घंटे का शेड्यूल तय हुआ हैं। जहां से भरी जाने वाली हुंकार पूरे महाकोशल को बड़ा संदेश देगी। न सिर्फ जनता को बल्कि पार्टी के उन दावेदारों को भी, जो चुनाव मैदान में उतरने की तमन्ना रखें हैं। किसी एक सीट से एक चेहरे पर ही भरोसा होगा, तो बाकी दावेदारों की बाद की भूमिका आज जैसी बनी रहे, इसका मंत्र सुनने मिल सकता हैं।

चित्रकूट में वैसे भी सत्ता और संगठन के सभी दिग्गज नेताओं के साथ कार्यकर्ताओं का बड़ा जमावड़ा देखा जा चुका हैं। अब बारी मंडला की है। जहां से महाकौशल की सूरत पर नजरे इनायत की जाएगी। पार्टी को चिंता जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान टिकट के दावेदारों में प्रतिस्पर्धा से ज्यादा झगड़ा झंझट की नौबत नहीं आने देने को लेकर बनी हुई है। क्योंकि घोषित उम्मीदवारों की सीट पर कलह पार्टी के अंदर अभी थमा नहीं है। इसका प्रभाव महाकौशल में भी है और बाद में जारी होने वाली लिस्ट में ऐसा न हो, यह प्रयास हो रहा हैं। वैसे भी शाह वो चेहरा है जिनके सामने हद से ज्यादा कोई बोलने की हिमाकत नहीं कर सकता।

इस इलाके में छिंदवाड़ा फिर बालाघाट के बाद मंडला की जमीन पर शाह के कदम पड़ेंगे। सियासी नब्ज के हिसाब से विंध्य, बुंदेलखंड के साथ महाकौशल अंचल ने पिछले चुनाव में बीजेपी को काफी नुकसान पहुंचाया था। जिसकी वजहें ढेरों रही। इसके अलावा जब-जब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ, उस वक्त इसी अंचल की सीटों ने जीत-हार के समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। जातिगत समीकरणों के हिसाब से आदिवासी ओबीसी की उन सीटों को पार्टी अपनी झोली में वापस चाहती है, जो पिछली बार अपने ही हाथ से फिसलने दी।

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