सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव ठाकरे गुट से शिवसेना की संपत्ति के ट्रांसफर की मांग क्यों खारिज की? जानिए
सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना की संपत्ति मामले में उद्धव ठाकरे गुट को फौरी राहत दी है। अदालत ने इस मामले में याचिकाकर्ता का कोई संबंध नहीं होने की वजह से उसकी याचिका को खारिज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें महाराष्ट्र सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि शिवसेना की जो भी संपत्ति उद्धव ठाकरे गुट के पास है, उसे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्ष वाली शिवसेना को ट्रांसफर कर दिया जाए।
शिवसेना की संपत्ति ट्रांसफर की मांग वाली याचिका खारिज
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने इस मामले से याचिका डालने वाले याचिकाकर्ता आशीष गिरी के मतलब (locus) के बारे में सवाल किया और याचिका खारिज कर दी। आशीष गिरी एक वकील हैं। उन्होंने शिवसेना की चल-अचल संपत्ति को उद्धव गुट से शिंदे गुट को ट्रांसपर करने की मांग की थी।
इस मामले में आप क्या कर रहे हैं?
अदालत ने याचिकाकर्ता से सवाल किया, 'आप कौन हैं? आपका locus क्या है..... ' यह कहते हुए अदालत ने कहा, 'खारिज।' यह याचिका मुंबई के वकील आशीष गिरी की ओर से डाली गई थी और अदालत से मांग की गई थी कि ठाकरे गुट को पार्टी फंड के ट्रांसफर से रोकने के लिए निर्देश दिया जाए।
आपके अनुरोध पर ध्यान नहीं दिया जा सकता-सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, 'यह किस तरह की याचिका है और आप कौन हैं? आपके अनुरोध पर ध्यान नहीं दिया जा सकता।' गिरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका इसलिए डाली गई, क्योंकि यहां ठाकरे और शिंदे गुट के बीच के झगड़े को लेकर कई याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है।
शिंदे और उद्धव गुट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला है सुरक्षित
उन्होंने कहा था कि पार्टी की संपत्ति को शिंदे गुट को ट्रांसफर किया जाना चाहिए। 16 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट की ओर से कई तरह की याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने सीएम शिंदे गुट की पार्टी को शिवसेना मानते हुए उसे ही धनुष और बाण निशान मंजूर किया है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर अभी फैसला आना बाकी है। जिसकी वजह से महाराष्ट्र में सियासी सरगर्मी भी बढ़ी हुई है।












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