Vadhavan Port Project: महाराष्ट्र में बनने जा रहा है विश्वस्तरीय बंदरगाह, 10 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार
Vadhavan Port Project: केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव संपन्न होते ही महाराष्ट्र को बड़ी सौगात दी है। लगातार तीसरी बार सत्ता पर काबिज मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के शुरू होने के चंद दिनों में ही महाराष्ट्र के 76,000 करोड़ रुपये की वधावन बंदरगाह परियोजना को मंजूरी दे दी है। महाराष्ट्र की शिंदे सरकार की ये बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
महाराष्ट्र के उपमुख्यंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार महाराष्ट्र में बनने जा रहा ये वधावन बंदरगाह दुनिया के टॉप 10 पोर्ट में शुमार होगा। इतना ही नहीं केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की इस पहल से महाराष्ट्र में लगभग 10 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के तहत अपनी दूसरी बैठक में महीनों के विचार-विमर्श के बाद बुधवार को महाराष्ट्र में 76,220 करोड़ रुपये की वधावन बंदरगाह परियोजना को मंजूरी दे दी।
यह भारत में सबसे बड़ी बंदरगाह परियोजनाओं में से एक होगी और आगामी भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर (आईएमईसी) और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) के लिए प्रवेश द्वार बंदरगाह के रूप में काम करने की उम्मीद है।
Vadhavan Port प्रोजेक्ट 7,453 करोड़ रुपये की म
कैबिनेट ने 7,453 करोड़ रुपये का viability gap financing (वीजीएफ) प्रोजेक्ट को मंजूरी देकर देश की अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं के पहले सेट की योजना भी शुरू की।
बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इसके संबंध में एक पोस्ट भी शेयर की थी जिसमें उन्होंने लिखा "महाराष्ट्र के वधावन में एक प्रमुख बंदरगाह विकसित करने पर कैबिनेट के फैसले से आर्थिक प्रगति को बढ़ावा मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।"
गौरतलब है कि इस बंदरगाह का निर्माण वधावन पोर्ट प्रोजेक्ट लिमिटेड (वीपीपीएल) द्वारा किया जाएगा, जो जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) और महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (एमएमबी) द्वारा गठित एक विशेष प्रयोजन वाहन है, जिसकी हिस्सेदारी 74 प्रतिशत और 26 प्रतिशत है।
वधावन बंदरगाह को सभी मौसम के अनुकूल ग्रीनफील्ड डीप ड्राफ्ट प्रमुख बंदरगाह के रूप में विकसित किया जाएगा। इस पर आने वाले खर्च के बारे सरकार की ओर से बयान जारी किया गया उसमें कहा गया परियोजना की लागत में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड में मुख्य बुनियादी ढांचे, टर्मिनलों और अन्य वाणिज्यिक बुनियादी ढांचे का विकास शामिल होगा।












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