उद्धव ठाकरे को बीजेपी से गठबंधन नहीं करने का है पछतावा, महाराष्ट्र के मंत्री का दावा
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों की ओर से दावे और बयानबाजी का सिलसिला कम नहीं हो रहा है। अब सीएम शिंदे गुट के दिग्गज नेता ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे बीजेपी से गठबंधन नहीं करके पछता रहे हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों के विवाद के बीच सीएम एकनाथ शिंदे की पार्टी के नेता ने एक नया दावा किया है। पार्टी के दिग्गज नेता और राज्य में कद्दावर मंत्री दीपक केसरकर ने कहा है कि उद्धव ठाकरे तो पछता रहे हैं कि उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन क्यों नहीं किया। उनका कहना है कि वह सिर्फ मुख्यमंत्री बनने की लालच में कांग्रेस-एनसीपी की ओर चले गए थे। गौरतलब है कि शिवसेना के दोनों गुटों का विवाद चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में लंबित है।

उद्धव को बीजेपी से गठबंधन नहीं करने का पछतावा-शिंदे के मंत्री
महाराष्ट्र के मंत्री दीपक केसरकर ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे को बीजेपी से गठबंधन नहीं करने का मलाल है, क्योंकि कांग्रेस और एनसीपी ने उन्हें 5 साल के लिए सत्ता का लालच दिया दे दिया था। केसरकर ने बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा, 'मैंने खुद देखा है कि बालासाहेब ठाकरे के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कितने संवेदनशील रहे हैं। जैसे ही वे (पीएम मोदी) महाराष्ट्र पहुंचे, उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह इस्तीफा दे देंगे और बीजेपी के साथ गठबंधन करेंगे। प्रधानमंत्री ने पार्टी के सदस्यों को समझाने के लिए उन्हें समय दिया, लेकिन मुख्यमंत्री बनने की लालच में उन्होंने वादा तोड़ दिया।'

उद्धव को गलती का एहसास है- दीपक केसरकर
उन्होंने यह भी कहा है कि उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के नेताओं को भगोड़ा कहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें सबके सामने सच लाना चाहिए। वो बोले, 'उद्धव ठाकरे को भी कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन करने और हिंदुत्व की विचारधारा से दूर होने की गलती का एहसास है।' उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस के जरिए उद्धव के चुनाव आयोग को लेकर दिए बयान को भी सहानुभूति हासिल करने का हथकंडा बताया है। वो बोले, 'सार्वजनिक रूप से यह बयान देने की क्या जरूरत थी? आप सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकते थे कि आपकी कुछ मांग है। यह सिर्फ सहानुभूति बटोरने के लिए है, लेकिन राजनीति सहानुभूति से नहीं चलती।' उद्धव ने कहा था कि शिवसेना के कथित बागी विधायकों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पहले आना चाहिए, उसके बाद चुनाव आयोग को मूल शिवसेना के चुनाव चिन्ह पर निर्णय करना चाहिए।

उद्धव ने कहा था कि पहले अयोग्यता का मसला तय हो
उद्धव ने यह भी कहा था कि 'एक्सपर्ट भी कहते हैं कि यह पूरी तरह से अयोग्यता का मसला है, इसलिए अयोग्यता के मामले पर पहले विचार होना चाहिए। ये गद्दार गुट कहता है कि उनके पास संख्या है और पार्टी उनकी है, लेकिन यह सही नहीं हो सकता, क्योंकि ऐसे तो कोई भी पार्टी खरीद और बना सकता है। हमने चुनाव आयोग के पास हमारे सभी पार्टी सदस्यों के बारे में सभी हलफनामें जमा कर दिए हैं और मैं नहीं मानता कि कोई दो शिवसेना है।' उन्होंने यह भी कहा कि वे लोग चाहते थे कि 23 जनवरी को पार्टी के अध्यक्ष का चुनाव हो क्योंकि उनका कार्यकाल खत्म हो चुका है। लेकिन, उद्धव बालासाहेब ठाकरे शिवसेना को चुनाव आयोग से कोई जवाब नहीं मिला।

असली शिवसेना पर होना है फैसला
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने मूल शिवसेना के धनुष और बाण चुनाव चिन्ह को जब्त कर लिया है। पिछले साल नवंबर में मुंबई की अंधेरी पूर्व विधानसभा उपचुनाव में 'दो तलवार और ढाल' मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट को और 'मशाल' उद्धव ठाकरे गुट को आवंटित किया गया था। उद्धव के मुताबिक शिवसेना के चुनाव निशान की बहस अब सुप्रीम कोर्ट में है और चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से अपने दस्तावेज जमा करने को कहा है। उनके मुताबिक उनकी ओर से सारे दस्तावेज चुनाव आयोग के पास जमा कराए जा चुके हैं।
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एकनाथ शिंदे ने उद्धव को सत्ता से बेदखल किया था
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ शिवसेना के विधायकों ने बगावत का झंडा पिछले साल 20 जून को उठाया था। इस गुट की अगुवाई मौजूदा मुख्यमंत्री और बालासाहेबांची शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे कर रहे थे। पहले बागी विधायक मुंबई से सूरत गए और फिर वहां से गुवाहाटी शिफ्ट हो गए। शिंदे ने ऐलान किया था कि उनके सभी समर्थक विधायक 'कट्टर शिवसैनिक' हैं और वे सत्ता के लिए बालासाहेब (शिवसेना के संस्थापक) के आदर्शों के साथ कभी भी धोखाधड़ी नहीं करेंगे। 10 दिन के बड़े सियासी ड्रामे के बाद 30 जून, 2022 को शिंदे ने बीजेपी के समर्थन से सरकार बना ली और 4 जुलाई, 2022 को विधानसभा में बहुमत भी साबित कर दिया।












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