Thane-Borivali Twin Tunnel: कब तक बनकर पूरा होगा ठाणे-बोरीवली सुरंग, जानें इसके बारे में हर डिटेल
Thane-Borivali Twin Tunnel: ठाणे-बोरीवली सुरंग परियोजना से ठाणे और बोरीवली के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। इस महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना का लक्ष्य वर्तमान 80 मिनट की यात्रा को घटाकर आधे से भी कम करना है। ये टनल 12 किलोमीटर के आसपास होगी।
ठाणे-बोरीवली भूमिगत सुरंग पर काम आगामी महीनों में शुरू होने वाला है। ठाणे-बोरीवली सुरंग एक ट्विन टनल है, जिनमें से प्रत्येक की लंबाई अलग-अलग है। उत्तर की ओर जाने वाली सुरंग 5.75 किलोमीटर तक फैली होगी, जबकि दक्षिण की ओर जाने वाली सुरंग 6.05 किलोमीटर तक फैली होगी। दोनों सुरंगों में सुगम और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए हाई क्वालिटी की सुविधा होगी।

Thane-Borivali Twin Tunnel Timeline: कब तक बनकर पूरा होगा ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल?
मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) इस विशाल परियोजना की देखरेख कर रहा है, जिसकी लागत करीब 14,400 करोड़ होने की उम्मीद है। इस परियोजना को पांच साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे यात्रियों के लिए कनेक्टिविटी और सुविधा में सुधार होने का वादा किया गया है।
निर्माण में टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का उपयोग किया जाएगा, जो विभिन्न प्रकार की मिट्टी और चट्टानों की खुदाई करेगी। इस प्रक्रिया से अनुमानित 3.5 मिलियन क्यूबिक मीटर मिट्टी निकलेगी, जो लगभग 1,40,000 ट्रक लोड के बराबर है।
Thane-Borivali Twin Tunnel News:ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल के बारे में जानें अहम बातें?
- सुरंगों का आंतरिक व्यास 11.8 मीटर और बाहरी व्यास 13.05 मीटर होगा। प्रत्येक सुरंग में यातायात को कुशलतापूर्वक समायोजित करने के लिए तीन लेन होंगी।
- तीन लेन वाली ये टनल 5.75 किलोमीटर और 6.09 किलोमीटर लंबी हैं, जो इन्हें भारत की सबसे लंबी भूमिगत सड़क सुरंग बनाती हैं। ये सुरंगें संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे से गुजरेंगी, जिससे पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचेगा।
- निर्माण गतिविधियों को सुव्यवस्थित करने और समय पर पूरा होने को सुनिश्चित करने के लिए परियोजना को कई पैकेजों में विभाजित किया गया है।
- ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल को लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड द्वारा बनाया जा रहा है। ये भारत की एक मशहूर कंस्ट्रक्शन कंपनी है।
- इस पहल का उद्देश्य न केवल सुगम यात्रा को बढ़ाना है, बल्कि ठाणे और बोरिवली के बीच मौजूदा मार्गों पर यातायात की भीड़ को कम करना भी है। ठाणे-बोरीवली सुरंग परियोजना भारत में शहरी बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए, सुरंग खोदने वाली मशीनों का उपयोग 23 मीटर की कम सतह पर किया जा रहा है। यह तरीका खुदाई के दौरान पार्क और उसके आस-पास के इलाकों की सुरक्षा में मदद करता है।












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