एनसीपी के गढ़ में शरद पवार का ही सिक्का चलेगा, अजित पवार को लेकर क्या सोचते हैं लोग? जानिए
एनसीपी की फर्स्ट फैमिली में जो राजनीतिक लड़ाई छिड़ी है, उसकी आंच पवार के गढ़ तक पहुंच चुकी है। पश्चिमी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच बुजुर्ग शरद पवार के साथ इस उम्र में हो रही सियासी फजीहत को लेकर सहानुभूति दिख रही है।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर, सांगली और सतारा जिलों में एनसीपी संस्थापक शरद पवार के प्रति काफी समर्थन नजर आता है। हालांकि, युवा वर्ग में अजित पवार की भी अपनी एक लोकप्रियता है। कुल मिलाकर पार्टी कार्यकर्ताओं में पार्टी के संकट को लेकर दुख भी है और नाराजगी भी नजर आती है।

'अजित पवार के स्टैंड ने सबको कंफ्यूज्ड किया है'
टीओआई ने कुछ एनसीपी कार्यकर्ताओं से बातचीत के आधार पर एक रिपोर्ट दी है। मसलन, कोल्हापुर के एक पार्टी कार्यकर्ता रमेश मोरे ने कहा कि शरद पवार के लिए उनके मन में बहुत सम्मान है। 2014 में मोदी लहर के बावजूद उन्होंने अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित की थी। उन्होंने कहा, 'वह सभी वर्गों के लोगों से मिलते हैं। पिछले कुछ समय से अजित पवार यहां कम नजर आते थे। उनके स्टैंड ने सबको कंफ्यूज्ड किया है।'

'बुजुर्ग पवार का शब्द अंतिम'
सांगली में ऊपर से लेकर नीचे तक एनसीपी की सारी यूनिट ने शरद पवार के प्रति वफादार रहने का प्रस्ताव पास किया है। बुधगांव के एक युवा अंगूर किसान शैलेष पाटिल ने कहा, 'मैं उन्हीं के विचारों के कारण न कि अजित पवार या किसी अन्य नेता की वजह से एनसीपी में शामिल हुआ था।' सतारा के धेबेवाड़ी के एक कार्यकर्ता बंदु छवन ने कहा कि बुजुर्ग पवार का शब्द उनके लिए अंतिम है। 2019 के लोकसभा चुनाव में उदयनराजे भोसले के खिलाफ श्रीनिवास पाटिल को जीत दिलाने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की थी।

'अजित पवार ने राजनीतिक आत्महत्या कर ली है'
वहीं अहमदनगर के श्रीरामपुर तालुका के राजेश बोर्डे ने कहा, 'अगर एनसीपी की राष्ट्रीय राजनीति में कोई ताकत है, तो वह पवार साहेब के कारण है। उनकी पीठ में छुरा घोंपा गया है।' नाशिक में चंदवाड़ तालुका के सयाजी गायकवाड़ को लगता है कि अजित पवार और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने राजनीतिक आत्महत्या कर ली है। उन्होने कहा, 'मुझे विश्वास था कि अगले साल एमवीए सत्ता में आएगा। इन घटनाओं ने पार्टी कार्यकर्ताओं को दुविधा में डाल दिया है।'

'शरद पवार के लिए बहुत ज्यादा सहानुभूति है'
जलगांव में भी पार्टी सुप्रीमो को लेकर इसी तरह का नजरिया सामने आया। धनराज माली नाम के एक कार्यकर्ता ने कहा, 'शरद पवार के लिए बहुत ज्यादा सहानुभूति है। पार्टी को फिर से खड़े करने के लिए कार्यकर्ता उनके साथ जुटेंगे।'

'अजित दादा का फैसला सही है'
लेकिन, सारे कार्यकर्ता एक तरह से नहीं सोचते। कराड के एक वर्कर ने अजित पवार का समर्थन किया। उसके मुताबिक वे भीड़ जुटाने वाले नेता हैं और जो भी टास्क मिलता है, वह पूरा करते हैं। कार्य को पूरा करने की उनकी क्षमता युवाओं को उनकी ओर खींचता है। इसी तरह नाशिक के कलवान तालुका के राजेंद्र भामरे कहते हैं, 'जन प्रतिनिधियों को अपने चुनाव क्षेत्रों के लिए फंड का जुगाड़ करना चाहिए, लेकिन अगर वह विपक्ष में हैं तो उन्हें परेशानी होती है। सरकार में शामिल होने का अजित दादा का फैसला सही है।'

'दुख हो रहा है...इस उम्र में पवार को इतनी बड़ी जंग लड़नी पड़ रही है'
लेकिन, मराठवाड़ा में भी एनसीपी चीफ को ज्यादा समर्थन मिल रहा है। औरंगाबाद के राहुल तायडे ने कहा, 'मुझे यह देखकर काफी दुख हो रहा है कि इस उम्र में पवार को इतनी बड़ी जंग लड़नी पड़ रही है। संकट की इस घड़ी में हम उनके साथ हैं।' इसी तरह एक और कार्यकर्ता हृषिकेश देशमुख कहते हैं, 'हम यह देखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे कि साहेब की योजनाएं सफल हो जाएं।'













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