शरद पवार के परिवार में कैसे आई 'निजी और वैचारिक दूरी' ? अजित पवार के बारे में सुप्रिया सुले का कबूलनामा
एनसीपी नेता और महाराष्ट्र की बारामती लोकसभा क्षेत्र से सांसद सुप्रिया सुले ने पहली बार परिवार में पैदा हुई दूरी का खुलासा किया है। दरअसल, उनके चचेरे भाई अजित पवार एनसीपी के विधायकों को तोड़कर महाराष्ट्र की बीजेपी-शिवसेना सरकार में शामिल हो चुके हैं।
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक अजित पवार के महाराष्ट्र सरकार का हिस्सा बनने के बाद पहली बार एनसीपी संस्थापक शरद पवार की बेटी और उनकी चचेरी बहन सुप्रिया सुले ने माना है कि राज्य के उपमुख्यमंत्री के साथ उनके रिश्ते अब सामान्य नहीं रह गए हैं।

अब निजी और विचारिक दूरी आ चुकी है- सुप्रिया सुले
सुप्रिया सुले ने अपने भाई के बारे में कहा है, 'मुझे मानना पड़ेगा कि मेरे और अजित पवार के बीच अब निजी और विचारिक दूरी आ चुकी है...लेकिन उनके लिए मेरा सम्मान मेरी पूरी जिंदगी में उसी तरह का बना रहेगा।' सुले अजित पवार की छोटी बहन हैं।
हालांकि, एनसीपी में हुई टूट का ठीकरा बीजेपी पर फोड़ते हुए उन्होंने कहा है कि जिस तरह से भाजपा ने पार्टियों को तोड़ने के लिए सत्ता का दुरुपयोग किया है, वह उन्हें पसंद नहीं आया। पिछले जुलाई में अजित पवार पार्टी के 8 अन्य एमएलए के साथ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली बीजेपी-शिवसेना सरकार में शामिल हो गए थे, जिससे एनसीपी दो फाड़ हो गई थी।
अजित पवार की वजह से एनसीपी हुई दो फाड़
बाद में अजित पवार और पार्टी संस्थापक शरद पवार के बीच एनसीपी को लेकर शक्ति प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें विधायकों की संख्या के मामले में भतीजा चाचा पर भारी पड़ते नजर आए। इस विभाजन के बाद दोनों गुट खुद को असली एनसीपी बताने के दावे कर रहे हैं और मामला चुनाव आयोग के विचाराधीन है।
संसद में कहा था- 'हर घर में ऐसे भाई नहीं हैं, जो बहन का कल्याण देखते हैं'
इससे पहले संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान एनसीपी सांसद सुले ने कहा था, 'हर घर में ऐसे भाई नहीं हैं, जो बहन का कल्याण देखते हैं।' उनके इस बयान को सीधा अजित पवार का सुप्रिया सुले के पिता शरद पवार के साथ उनके बगावत से जोड़कर देखा गया।
बाद में बयान को पीएम मोदी और अमित शाह की ओर मोड़ दिया
लेकिन, शनिवार को जब उनसे उस भाषण के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब में कहा, 'अजित दादा मेरे बड़े भाई हैं और मैंने कभी भी उनके खिलाफ कुछ भी नहीं कहा है। संसद में मैंने जो कुछ भी कहा वह किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं था, बल्कि माननीय पीएम मोदीजी और अमित शाह द्वारा दिए गए के बयानों के खिलाफ था।'
वो बोलीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 10 वर्षों तक उनकी पार्टी की आलोचना की, लेकिन अब एनसीपी को 'नैचुरली करप्ट पार्टी' नहीं कहते हैं। हालांकि, सुले ने अपने भाई से निजी और वैचारिक दूरी होने की बात तो मानी है, लेकिन अजित पवार के बगावत के बाद ऐसे कई मौके आए हैं, जब दोनों चाचा-भतीजे की मुलाकात हुई है और कुछ अभी तक रहस्यमयी बन हुए हैं। इसको लेकर विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ने सार्वजनिक तौर पर शरद पवार की भूमिका को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं।












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