'3 महीने तक रहे जेल के अंदर तो...', शरद गुट के नेता ने 3 नए क्रिमिनल लॉ पर उठाए सवाल
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नए आपराधिक कानूनों की विषय-वस्तु शामिल करने के लिए एक ज्ञापन जारी किया है। जिसमें भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम का जिक्र किया गया है। बता दें कि ये तीन कानून 25 दिसंबर, 2023 को अधिसूचित किए गए थे। अब तीनों आपराधिक कानून एक जुलाई से लागू हो रहे हैं। ऐसे में भारतीय न्याय संहिता के तहत हिरासत की अवधि को लेकर एनसीपी आपत्ति जताई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) (एनसीपी-एसपी) के नेता जितेंद्र अवध ने शनिवार को कहा कि 90 दिनों की हिरासत जीवन बर्बाद कर देगी।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत, अपराध की प्रकृति के आधार पर, सामान्य आपराधिक कानूनों के तहत पुलिस हिरासत को 15 दिन से बढ़ाकर 90 दिन कर दिया गया है। नए कानून में 358 धाराएं होंगी (आईपीसी में 511 धाराओं के बजाय)। विधेयक में कुल 20 नए अपराध जोड़े गए हैं और उनमें से 33 के लिए कारावास की सजा बढ़ा दी गई है।

ऐसे में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) (एनसीपी-एसपी) के नेता जितेंद्र ने नए कानून की आलोचना की है। उन्होंने कहा, "यह सीआरपीसी की जगह लेने वाला कानून है। यह कानून पुराना है, केंद्र के नेता ऐसा कह रहे हैं। अब 90 दिन की पुलिस हिरासत होगी। अगर एक छोटे से अपराध के लिए 90 दिन हिरासत में रखोगे तो पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। खासकर हम जैसे राजनीतिक कार्यकर्ता, जो असहमति की आवाज हैं, विद्रोह की आवाज हैं, अगर उनकी आवाज को दबाने के लिए उन्हें 90 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है, फिर सितंबर में हमारे जैसे 10 लोगों को उठाया जाता है और हिरासत में लिया जाता है, तो हम। चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "अगर हम 3 महीने तक अंदर रहेंगे, तो हम कहां से चुनाव लड़ेंगे?... उन्होंने (बीजेपी नेताओं) कहा कि वे मुस्लिम पर्सनल लॉ खत्म कर देंगे, जिसका मतलब है कि वे संविधान बदलने जा रहे हैं..."
बता दें कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत 83 अपराधों में जुर्माने की राशि बढ़ा दी गई है और 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा का प्रावधान किया गया है। छह अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा का दंड पेश किया गया है और 19 धाराओं को विधेयक से निरस्त या हटा दिया गया है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धाराएं (सीआरपीसी की 484 धाराओं के स्थान पर) होंगी। बिल में कुल 177 प्रावधान बदले गए हैं और इसमें नौ नई धाराओं के साथ ही 39 नई उपधाराएं जोड़ी गई हैं। मसौदा अधिनियम में 44 नए प्रावधान और स्पष्टीकरण जोड़े गए हैं। 35 अनुभागों में समय-सीमा जोड़ी गई है और 35 स्थानों पर ऑडियो-वीडियो प्रावधान जोड़ा गया है।












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