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Maharashtra: शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे प्रोजक्‍ट क्‍या है? किन धार्मिक स्‍थलों, जिलों को जोड़ेगा 802 km का ये मार्ग

Shaktipeeth Expressway Project: महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस कैबिनेट ने नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे परियोजना को मंजूरी दे दी है। फडणवीस सरकार ने शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे भूमि अधिग्रहण को मंजूरी देते हुए इसके विकास के लिए 20,787 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया। याद रहे विधानसभा चुनावों से पहले इस परियोजना पर रोक लगा दी गई थी क्योंकि विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (एमवीए) और प्रभावित किसानों ने इसका कड़ा विरोध किया था। जानिए महाराष्‍ट्र सरकार का ये प्रोजेक्‍ट क्‍या है और किन धाार्मिक स्‍थलों और जिलों को कवर करेगा।

महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसके प्रोजेक्‍ट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हाई-स्‍पीड कॉरिडोर से यातायात की सुविधा बढ़ने से लंबी दूरी कम समय में तय हो सकेगी और महाराष्‍ट्र के धार्मिक और पर्यटन स्‍थलों पर पहुंचना आसान होगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

Shaktipeeth Expressway Project

8 घंटे में नागपुर से गोवा पहुंच सकेंगे

शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के तहत 802.6 किलोमीटर का दूरी तक एक्‍सप्रेसवे तैयार किया जाएगा। ये एक्‍सप्रेस हाईवे पूर्वी महाराष्‍ट्र को दक्षिण कोंकड से जोड़ते हुए महाराष्‍ट्र के 12 और गोवा के एक जिले से गुजरेगा।इस एक्‍सप्रेसवे के तैयार हो जाने के बाद नागपुर से गोवा तक का सफर 18 घंटे के बजाय 8 घंटे में पूरा होगा।

शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे किन जिलों को जोड़ेगा?

ये एक्‍सप्रेसवे पूर्व महाराष्‍ट्र के वर्धा जिले के पवनार से गोवा सीमा के पास पश्चिमी महाराष्‍ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के पात्रा देवी तक फैला होगा। ये एक्सप्रेसवे के तैयार हो जाने के बाद 12 जिलों, वर्धा, यवतमाल, हिंगोली, नांदेड़, परभणी, बीड, लातूर, धाराशिव, सोलापुर, सांगली, कोल्हापुर और सिंधुदुर्ग से होकर गुजरेगा, बाद में यह कोंकण एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा।

किन धार्मिक स्‍थलों को जोड़ेगा ये शक्तिपीठ एक्‍सप्रेसवे

इस एक्सप्रेसवे का उद्देश्य महाराष्ट्र के कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक स्थलों को जोड़ना है। इनमें माहूर, तुलजापुर, कोल्हापुर,ambejogai और अन्य धार्मिक स्थल जैसे औंधा नागनाथ और परली वैजनाथ दो ज्योतिर्लिंग, पंढरपुर, करंजा-लाड, अक्कलकोट, गंगापुर, नरसोबाची वाडी और औदुम्बरा शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह राजमार्ग इन स्थानों तक तेज और सुगम पहुंच प्रदान करके धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा।

भूमि अधिग्रहण और किसानों का विरोध

बता दें भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को समर्थन देने के लिए, सरकार ने हुडको से 12,000 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किया है। इन फंडों का उपयोग करके लगभग 7,500 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किए जाने की उम्मीद है। TOI की रिपोर्ट में कहा गया है कि महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) परियोजना के कार्यान्वयन का प्रभारी होगा।

इन प्रयासों के बावजूद, किसानों का विरोध जारी है। कई भूस्वामी भूमि अधिग्रहण के तरीके से नाखुश हैं। उनका कहना है कि सरकार आपत्तियों को ठीक से सुने बिना भूमि अधिग्रहण नोटिस जारी करके परियोजना को आगे बढ़ा रही है। पिछले साल, किसानों ने जमीन के नोटिस जलाए जिसके बाद इस परियोजना को भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। उस समय, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने वादा किया था कि लोगों पर कोई भी परियोजना थोपी नहीं जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया था, "हम जनता को विश्वास में लेने के बाद ही आगे बढ़ेंगे।"

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