हिंदू वोट चाहते हैं लेकिन महाकुंभ नहीं गए, रामदास अठावले बोले 'हिंदुओं उद्धव ठाकरे का बहिष्कार करो'
Maharashtra News: प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ 2025 का आज 26 फरवरी को शिवरात्रि के महापर्व पर अंतिम महास्नान के साथ समापन हो रहा है। महाकुंभ में त्रिवेणी संगम में स्नान करने के लिए देश ही नहीं विदेशों से बड़ी संख्या में श्रृद्धालु पहुंचे।
प्रयागराज महाकुंभ में पहुंंच कर त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने वाले करोड़ों लोगों में तमाम राजनीतिक हस्तियां, बॉलीवुड एक्टर, एक्ट्रेस, नामी बिजनेसमैन समेत जानी- मानी हस्तियां शामिल हैं। लेकिन विपक्षी कांग्रेस, गांधी परिवार और शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाकुंभ से दूरी बनाए रखी और आलोचना करते रहे।

गांधी परिवार और उद्धव ठाकरे के महाकुंभ में ना आने पर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने दोनों की कड़ी आलोचना की है और लोगों से आह्वान किया है कि उद्धव ठाकरे का हिंदुत्व से बहिष्कार कर देना चाहिए। आइए जानते हैं अठालवे ने क्या-क्या कहा?
उद्धव ठाकरे ने हिंदुओं का अपमान किया
रामदास अठावले ने उद्धव ठाकरे और राहुल गांधी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने महाकुंभ में भाग न लेकर हिंदू समुदाय का अपमान किया है। अठावले ने कहा "उद्धव ठाकरे हिंदुत्व की बात करते हैं लेकिन प्रयागराज में लगे महाकुंभ मेले में स्नान करने के लिए नहीं गए। उद्धव ठाकरे ओर गांधी परिवार ने महाकुंभ में ना जाकर हिंदुत्व का अपमान किया है। हिंदू होकर भी महाकुंभ मे ना जाना ये हिंदुओं का सीधे तौर पर अपमान है और हिंदुओं को इनका बहिष्कार करना चाहिए
"हिंदू वोट चाहिए लेकिन महाकुंभ नहीं गए"
अठावले ने यह भी कहा कि हिंदू मतदाताओं को ऐसे नेताओं का बहिष्कार करना चाहिए क्योंकि ये चुनावी लाभ के लिए हिंदू वोटों की तलाश कर रहे हैं लेकिन धार्मिक समारोहों में भाग नहीं लेकर हिंदुओं की भावनाओं का अपमान किया है।
अठावले ने कहा वे हिंदू वोट चाहते है इसके बाद भी महाकुंभ नहीं गए,मुझे लगता है कि हिंदू वोटर्स उनका बहिष्कार जरूर करेंगे। उन्होंने कहा अभी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हिंदुओं ने ऐसे नेताओं को सबक सिखाया है और आगे और मजा चखाएंगे।
महाकुंभ में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत इन दिग्गजों ने किया पवित्र स्नान
महाकुंभ का आयोजन हाल ही में हुआ था, जिसमें बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं ने स्नान किया। इस आयोजन में देश के कई महत्वपूर्ण नेता शामिल हुए, जिनमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल थे। अठावले के बयान में यह भी दर्शाया गया है कि जनता की भावना को समझते हुए ठाकरे और गांधी को महाकुंभ में उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए थी।












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