Rahul Narwekar को ही BJP ने फिर क्यों बनाया महाराष्ट्र विधानसभा का स्पीकर? बड़े मौकों पर आ चुके हैं काम
Maharashtra Assembly Speaker Rahul Narwekar: मायानगरी की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक कोलाबा से बीजेपी के विधायक राहुल नार्वेकर लगातार दूसरी बार महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर चुने गए हैं। उनके खिलाफ विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा, इसलिए वह निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। उन्हें दूसरी बार स्पीकर बनाने की वजह यह लग रही है कि पिछली बार महायुति उन्हें आजमा चुका है और भाजपा को लगता है कि वह हर कठिन परिस्थितियों में काम आने में सक्षम हैं।
नार्वेकर के नामांकन के लिए रविवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और दोनों उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार के साथ प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले समेत अन्य बड़े नेता भी पहुंचे थे। नार्वेकर पर बीजेपी ने इतना भरोसा क्यों जताया है, इसकी वजह दिलचस्प है।

विपक्ष के नेता पर क्या फैसला करेंगे स्पीकर राहुल नार्वेकर?
सबसे पहली बात की महाराष्ट्र विधानसभा में इस बार किसी भी विपक्षी दल को 10% सीटें नहीं मिली हैं। ऐसे में कोई भी पार्टी विपक्ष के नेता का पद हासिल करने के लिए नियमुनासार योग्य नहीं है। ऐसे में स्पीकर के तौर पर राहुल नार्वेकर की भूमिका इस मामले में बहुत अहम हो जाएगी और देखने वाली बात होगी कि वह इसको लेकर क्या तय करते हैं। वैसे अगर केंद्र में बीजेपी सरकार के नजरिए से देखें तो 2014 और 2019 में लोकसभा में किसी भी दल को यह पद नहीं दिया गया था।
इसे भी पढ़ें- Rahul Narwekar: कौन हैं राहुल नार्वेकर? लगातार दूसरी बार संभालेंगे महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर की जिम्मेदारी
शिवसेना और एनसीपी विधायकों के अयोग्यता के मामलों की वजह से सुर्खियों में आए
पहली बार के विधायक नार्वेकर को जुलाई 2022 में तब स्पीकर चुना गया था, जब शिवसेना के एकनाथ शिंदे की अगुवाई में महायुति (बीजेपी-शिवसेना) की सरकार बनी थी। पद संभालते ही वे इस वजह से सुर्खियों में आ गए, क्योंकि उनके पास शिवसेना के विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए कई याचिकाएं आ गई थीं।
बाद में उनके सामने एनसीपी एमएलए की अयोग्यता के मामले भी दायर हुए और इन दोनों मामलों की वजह से वे लगातार मीडिया में भी सुर्खियों में बने रहे। राजनीतिक रूप से तब स्पीकर का पद महायुति सरकार के लिए बहुत ही अहम था।
अयोग्यता पर फैसले में देरी की वजह से सुप्रीम कोर्ट के भी निशाने पर आए
इस दौरान अयोग्यता पर फैसले में देरी की वजह से कई दफे वे सुप्रीम कोर्ट के निशाने पर भी आ गए। खासकर इस वजह से कि अयोग्यता पर फैसले में देरी हो रही थी, लेकिन वह मीडिया में इंटरव्यू देते नजर आ रहे थे।
अयोग्यता के मसले को कथित तौर पर लटकाने का आरोप लगाकर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने उनपर हमले का कोई मौका नहीं छोड़ा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें फैसला देने के लिए एक डेडलाइन भी दी थी,जिसका उन्हें पालन करना पड़ा।
किसी भी परिस्थिति में अपने 'पथ' से नहीं भटके नार्वेकर!
हालांकि, फिर भी नार्वेकर कभी विचलित नहीं हुए और शायद यही वजह है कि बीजेपी ने उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखा है, जो मुश्किल परिस्थितियों में भी बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं।
कौन हैं राहुल नार्वेकर?
राहुल नार्वेकर पेशे से वकील रहे हैं और महाराष्ट्र विधानसभा के सबसे युवा स्पीकर हैं। वह 2019 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले बीजेपी में शामिल हुए थे और तभी कोलाबा जैसी प्रतिष्ठित सीट से जीत दर्ज करके भाजपा नेतृत्व के आंखों में बस गए। इस चुनाव में उन्होंने लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर बीजेपी में अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है।
कोलाबा में इस बार बड़ी जीत दर्ज कर विधायक बने हैं नार्वेकर
2019 के विधानसभा चुनाव में जहां दक्षिण मुंबई की कोलाबा सीट पर उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को मात्र 16,195 वोटों से हराया था, वहीं इस बार उसी पार्टी के उम्मीदवार को वे 48,581 वोटों से हराने में सफल हुए हैं।
इसे भी पढ़ें- महाराष्ट्र कैबिनेट में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के ये 11 विधायक बनेंगे मंत्री, जानिए कौन हैं वो नेता?
हालांकि, इस बार महायुति के पास 288 सदस्यों वाले सदन में जिस तरह से 234 विधायकों का विशाल बहुमत है, उससे नार्वेकर की चुनौती पिछली बार से काफी आसान लग रही है। लेकिन, राजनीति में आगे चलकर कब उनकी भूमिका फिर से अहम हो जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।












Click it and Unblock the Notifications