नहीं सोचा होगा ये आखिरी Goodbye होगा, बेटे को नागपुर छोड़ लौट रहे थे माता-पिता और बहन की बस हादसे में मौत
Maharashtra Buldhana Expressway Accident: महाराष्ट्र के बुलढाणा में समृद्धि महामार्ग एक्सप्रेसवे पर एक जुलाई की सुबह 32 यात्रियों को ले जा रही एक बस में आग लगने से 26 लोगों की मौत हो गई है। इस हादसे ने कई परिवारों को तबाह कर दिया।
ऐसा ही एक पुणे का रहने वाला परिवार था। एक 52 वर्षीय शिक्षक, जो नागपुर में एक लॉ कोर्स में दाखिला लेने वाले अपने बेटे को छोड़कर लौट रहे थे, शनिवार की बुलढाणा बस दुर्घटना में उनकी पत्नी और बेटी के साथ मारे गए।

पुणे से लगभग 400 किलोमीटर दूर सिंदखेडराजा में समृद्धि महामार्ग एक्सप्रेसवे सुबह साढ़े पांच बजे के करीब एक प्राइवेट बस में टायर फटने से आग लग गई, जिसमें 26 यात्रियों की मौत हुई, उसमें पुणे के तीन निवासी भी शामिल थे, जो अपने बेटे को छोड़कर आ रहे थे।
52 वर्षीय स्कूल में अंग्रेजी के शिक्षक कैलास गंगावणे, उनकी पत्नी कंचन और उनकी बेटी रुतुजा अपने बेटे आदित्य को नागपुर में किसी लॉ कोर्स में एडमिशन लेने के लिए छोड़ने गए थे। बेटे को छोड़ने के बाद वह तीनों अपने पैतृक गांव निर्गुडसर लौट रहे थे।
लेकिन रास्ते में बस हादसे में जलकर कैलास गंगावणे, उनकी पत्नी कंचन और उनकी बेटी रुतुजा की मौत हो गई। उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि वो उनके बेटे से उनकी आखिरी मुलाकात होगी।
कैलास के चचेरे भाई रूपेश गंगावणे ने कहा, "चारों बुधवार को नागपुर गए थे। हमें दुर्घटना के बारे में सुबह 5:30 बजे पता चला। हमारे एक रिश्तेदार, जो एक पुलिसकर्मी है, ने मुझे बताया कि तीनों के जले हुए शव एक-दूसरे से लिपटे हुए पाए गए थे।"
रूपेश गंगावणे ने कहा कि वह और उनका परिवार शवों की शिनाख्त करने के लिए और आगे की औपचारिकताओं के लिए बुलढाणा में हैं।
उन्होंने कहा, "परिवार मूल रूप से पुणे के शिरूर तहसील का रहने वाला है। कैलास को शिक्षण की नौकरी मिलने के बाद वे निर्गुडसर में बस गए थे।
वहीं शिक्षक की पत्नी कंचन गंगावणे के भाई अमर काले ने कहा कि बस हादसे में मारे गए लोगों के शव इतने जल गए हैं कि उनकी पहचान नहीं हो पा रही है और उनकी पहचान के लिए डीएनए टेस्ट कराना होगा।












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