वर्षों से हमें हल्के में लिया,अब बैलेट बॉक्स से बदला लेने का समय, दशहरे पर राज ठाकरे की दहाड़
Maharashtra Chunav 2024: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में राजनीति पार्टियों के बीच सियायत की जंग का बिगुल बज चुका है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने दशहरे के अवसर पर एक पार्टी कार्यक्रम में वोटरों के बीच जमकर दहाड़ लगाई।
इसके साथ ही उन्होंने पौराणिक कथाओं का हवाला देते हुए आह्वान किया कि ये चुनाव वोट की शक्ति से बैलेट बॉक्स के जरिए बदला लें। उन्होंने कहा चुनाव के अवसर का इस्तेमाल करके वोटर अपने भविष्य पर नियंत्रण पास सकते हैं।
दशहरा कार्यक्रम में राज ठाकरे ने कहा चुनाव एक राजनीतिक परिवर्तन के लिए एक महत्वपूर्ण समय है। ठाकरे ने महाराष्ट्र के लोगों से "शमी के पेड़ से हथियार हटा लेने" की सीधी अपील की, जो युद्ध के लिए तैयार होने और राजनीतिक के खिलाफ अपना बदला लेने का एक प्रतीक है। उनके अनुसार, वह वर्ग वर्षों से उन्हें हल्के में लेता रहा है।

पॉडकास्ट के जरिए ठाकरे ने लोगों से बात करते हुए कहा दशहरा वर्ष के सबसे शुभ दिनों में से एक है। इस दिन सोने के रूप में शमी के पेड़ की पत्तियों का आदान-प्रदान करते हैं, लेकिन वर्षों से, महाराष्ट्र की असली संपत्ति लूट ली गई है, अब कार्रवाई करने का समय है।"
उन्होंने भारतीय पौराणिक कथाओं से पांडवों की कल्पना का हवाला दिया, जिन्होंने शमी के पेड़ में अपने हथियार छिपाए थे, ताकि मतदाताओं को आगामी चुनावों में अपने सबसे शक्तिशाली हथियार-अपने वोट-का रणनीतिक रूप से इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जा सके।
ठाकरे ने मतदाताओं से विभाजनकारी राजनीति से ऊपर उठने और अपनी आवाज बुलंद करने का आग्रह करते हुए कहा, "आप अक्सर अपना वोट इस्तेमाल नहीं करते हैं, फिर अगले पांच साल इन्हीं राजनेताओं द्वारा लिए गए फैसलों पर पछताते रहते हैं। इस बार अपने वोट को अपने हथियार के रूप में इस्तेमाल करें। जाति, समुदाय या परिचितों के जाल में न फंसें।"
मतदाताओं की इस प्रवृत्ति पर निराशा व्यक्त करते हुए कि उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "ये नेता अजीबोगरीब गठबंधन बनाते रहते हैं, लेकिन आप इस सब में कहाँ खड़े हैं? आप उनकी योजनाओं में कहीं नहीं दिखते हैं।" उन्होंने राजनीतिक रणनीतियों में आम लोगों के प्रति उपेक्षा पर चिंता व्यक्त की।
राज ठाकरे ने दुख जताते हुए कहा "सड़कें और फ्लाईओवर बनाना वास्तविक प्रगति नहीं है। मोबाइल फोन और गैजेट्स होना विकास के बराबर नहीं है। सच्ची प्रगति पूरे समाज के उत्थान में निहित है। फिर भी, इतने सालों के बाद भी, हम अभी भी अंधेरे में टटोल रहे हैं, राजनीतिक वर्ग के झूठे वादों में फंसे हुए हैं।












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