Nitesh Rane को कोर्ट ने सुनाई 1 महीने जेल की सजा, क्या है 'कीचड़ कांड? जिसमें कोर्ट ने मंत्री को ठहराया दोषी
महाराष्ट्र के फडणवीस सरकार के मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे को 27 अप्रैल (सोमवार) को सिंधुदुर्ग की एक अदालत से तगड़ा झटका लगा है। नितेश राणे को 2019 के चर्चित 'कीचड़ कांड' मामले में दोषी ठहराया है। कोर्ट ने नितेश राणे को सार्वजनिक अपमान मामले में सोमवार को एक महीने की जेल की सजा सुनाई है। हालांकि अपील के लिए समय देते हुए सज़ा को निलंबित कर दिया।
यह घटना नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के एक इंजीनियर पर कीचड़ फेंकने से संबंधित है, जिसमें उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया था

'कानून बनाने वाले को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए'
कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि कानून बनाने वालों को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। इस मामले में राणे के साथ आरोपित 29 अन्य लोगों को बरी कर दिया गया है।
सरकारी अधिकारी का अपमान करने के आरोप में सजा सुनाई
सिंधुदुर्ग की अतिरिक्त सत्र अदालत ने, जिसकी अगुवाई न्यायाधीश वी एस देशमुख कर रहे थे, राणे को भारतीय दंड संहिता की धारा 504 (शांति भंग करने के इरादे से किया गया जानबूझकर अपमान) के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, दंगा, सरकारी कर्मचारी पर हमला और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों पर सबूतों की कमी के चलते 29 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया।
न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा, "भले ही राणे का इरादा काम की खराब क्वॉलिटी और लोगों को हो रही असुविधा के खिलाफ आवाज उठाना था, लेकिन उन्हें किसी सरकारी कर्मचारी को सार्वजनिक रूप से अपमानित या बेइज्जत नहीं करना चाहिए था।"
नितेश राणे की निलंबित की गई जेल की सजा
अदालत ने जोर देकर कहा कि "यदि ऐसी घटनाएं जारी रहती हैं, तो सरकारी कर्मचारी सम्मान के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर पाएंगे।" इस कृत्य को "सत्ता का दुरुपयोग" करार देते हुए, कोर्ट ने टिप्पणी की कि "ऐसी प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना समय की मांग है।" हालांकि, राणे की सजा उच्च अदालत में अपील करने के लिए निलंबित कर दी गई है।
क्या है इंजीनियर पर कीचड़ फेंकने का मामला?
यह मामला 4 जुलाई, 2019 का है। तब कांग्रेस विधायक रहे राणे ने NHAI के उप-विभागीय इंजीनियर प्रकाश शेडेकर को कांकावली में गढ़ नदी पुल के पास मुंबई-गोवा राजमार्ग के काम का निरीक्षण करने हेतु बुलाया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सड़कों की खराब हालत और जल-जमाव से नाराज राणे और उनके समर्थकों ने इंजीनियर पर कीचड़ वाला पानी डाला और उसे सार्वजनिक रूप से कीचड़ भरी जगह पर चलने के लिए मजबूर किया।
अदालत ने पाया कि पीड़ित, जो एक वरिष्ठ NHAI अधिकारी थे, को सार्वजनिक अपमान का सामना करना पड़ा। न्यायाधीश ने कहा, "इसके बावजूद, उन्हें सार्वजनिक रूप से कीचड़ भरे पानी में चलने पर मजबूर किया गया। यह निश्चित रूप से उनके लिए अपमानजनक और शर्मनाक था।" न्यायालय ने कहा कि इंजीनियर को कीचड़ भरे पानी में चलने पर मजबूर करना "मुखबिर का जानबूझकर अपमान" था, और यह एक ऐसा उत्तेजक कृत्य था जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने की संभावना थी।













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