Mumbai: शिवसेना (UBT) ने इंडिया गठबंधन की अनदेखी पर कांग्रेस को घेरा, अहमदाबाद अधिवेशन पर उठाए सवाल
Mumbai: शिवसेना (यूबीटी) ने कांग्रेस पार्टी पर महागठबंधन 'इंडिया ब्लॉक' की उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया है। शनिवार, 12 अप्रैल को शिवसेना ने कहा कि कांग्रेस को अपने अहमदाबाद अधिवेशन के दौरान इस गठबंधन की वर्तमान स्थिति पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए थी।
पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय लेख में यह सवाल उठाया है कि जब विपक्ष एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने की रणनीति बना रहा है, तब कांग्रेस केवल अपनी बात तक क्यों सीमित रह गई? शिवसेना (यूबीटी) का यह बयान तब सामने आया है जब विपक्षी पार्टियों वाली इंडिया गठबंधन की एकजुटता बार-बार और कई स्तरों पर सवालों के घेरे में है।

Mumbai: 'इंडिया' गठबंधन पर चुप्पी क्यों?
शिवसेना (यूबीटी) ने अपने संपादकिय में तीखा सवाल करते हुए कहा, " विपक्षी गठबंधन का क्या हुआ? क्या यह जमीन में समा गया या हवा में उड़ गया? इस सवाल का जवाब देना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जिम्मेदारी है।" पार्टी का कहना है कि जब पूरा देश लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद इंडिया गठबंधन की भविष्य की रणनीति जानना चाहता है, तब कांग्रेस द्वारा इसे इस तरह नजरअंदाज करना बेहद चिंताजनक है।
Shiv Sena ने अहमदाबाद अधिवेशन पर उठाया सवाल
8-9 अप्रैल को गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में अध्यक्ष खरगे, राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। शिवसेना (यूबीटी) का आरोप है कि इस अधिवेशन में केवल कांग्रेस की आंतरिक बातें हुईं, जबकि विपक्षी गठबंधन का कोई उल्लेख नहीं हुआ। पार्टी का कहना है कि जब गठबंधन में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करती है, तब उसे नेतृत्व की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
बिहार, गुजरात और बंगाल पर स्पष्टता मांगी
संपादकीय में शिवसेना (यूबीटी) ने बिहार, गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख राज्यों को लेकर कांग्रेस के रुख पर भी सवाल खड़े किए हैं। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) कांग्रेस की सहयोगी है, जबकि गुजरात में आम आदमी पार्टी और बंगाल में तृणमूल कांग्रेस इंडिया गठबंधन के सदस्य हैं। ऐसे में कांग्रेस को इन राज्यों में अपनी रणनीति स्पष्ट करनी चाहिए थी, लेकिन अधिवेशन में इस पर कोई चर्चा नहीं हुई।
शिवसेना (यूबीटी) ने कांग्रेस की गुजरात में कमजोर स्थिति की ओर इशारा करते हुए कहा कि 2014 के बाद पार्टी ने लोकसभा चुनाव में इस पश्चिमी राज्य में केवल एक सीट जीती है। ऐसे में यह अधिवेशन उस आत्ममंथन का माध्यम बन सकता था, जिससे पार्टी राज्य में अपनी खोई हुई जमीन वापस पा सके।
Maharashtra में कांग्रेस की भूमिका पर सवाल
पार्टी ने सलाह दी कि कांग्रेस को केवल गुजरात ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी गंभीर प्रयास करने होंगे। शिवसेना (यूबीटी) का मानना है कि कांग्रेस को सिर्फ अधिवेशन तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर गठबंधन को मजबूत करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।
महाराष्ट्र की बात करें तो शिवसेना (यूबीटी) ने माना कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को राज्य में सफलता मिली, लेकिन विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा। पार्टी ने कहा, "इस हार के लिए केवल भाजपा के घोटाले जिम्मेदार नहीं थे, बल्कि कांग्रेस के आंतरिक मसले भी उतने ही अहम कारण रहे।" शिवसेना ने कांग्रेस से आत्ममंथन की अपील की।
शिवसेना (यूबीटी) का यह तीखा संपादकीय यह संकेत देता है कि इंडिया गठबंधन की एकजुटता में कई दरारें हैं। दरअसल, कांग्रेस को इस गठबंधन का धुरी माना जाता है और अब आपसी संवाद की कमी और स्पष्ट रणनीति के अभाव से इस गठबंधन की लंबी पारी पर शंका गहराती जा रही है।












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