Patra Chawl Land Scam: पांच सितंबर तक जेल में ही रहेंगे शिवसेना सांसद संजय राउत, PMLA कोर्ट से बड़ा झटका

नई दिल्ली, 22 अगस्त। पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत को एक बार फिर से झटका लगा है। मामले की सुनवाई कर रही पीएमएलएक की विशेष अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत 5 सितंबर तक बढ़ा दी है। कोर्ट ने तीसरी बार राउत की हिरासत की अवधि बढ़ाई है। कोर्ट ने शिवसेना नेता की तीसरी बार ईडी कस्टडी की अवधि बढ़ाई गई है।

Sanjay Raut

मुंबई के पात्रा चॉल भूमि घोटाला में लगे आरोपों के बाद शिवसेना सांसद संजय राउत ईडी ने 31 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। इस दिन ईडी ने राउत के घर पर सुबह ही छापेमारी की थी। मामले में शिवसेना सांसद से करीब 8 घंटे पूछताछ की गई। जिसके बाद देररात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत की गिरफ्तारी के बाद को कोर्ट ने उन्हें 4 अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेजने का निर्देश दिया। 4 अगस्त को उनके हिरासत की समय पूरा हो रहा था, लेकिन ईडी ने पूछताछ के लिए कोर्ट के सामने हिरासत की अवधि बढ़ाने की मांग रखी थी। जिसके बाद राउत की ईडी कस्टडी 8 अगस्त, बाद में 22 अगस्त और अब कोर्ट ने उनकी हिरासत की अवधि बढ़ाकर 5 सितंबर कर दी है।

संजय राउत पर लगे आरोप

पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में गुरु कंस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशक रहे प्रवीण को ईडी ने प्रवीण को फरवरी 2022 में गिरफ्तार कर लिया था। बताया जाता है कि गुरु कंस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशक रहे प्रवीण राउत संजय राउत के करीबी हैं। आरोप हैं कि पात्रा चॉल घोटाले से प्रवीण ने 95 करोड़ रुपये जमा किए थे। जिसमें से कुछ पैसा उन्होंने अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को भी बांटा था। इसमें से 55 लाख रुपये संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत के खाते में आए थे। जिससे राउत ने दादर में एक फ्लैट खरीदा था।

क्या है पात्रा चॉल भूमि घोटाला?
मुंबई के गोरेगांव स्थित सिद्धार्थ नगर के पात्रा चॉल में महाराष्ट्र हाउसिंग डेवलपमेंड अथॉरिटी की जमीन खरीद से जुड़ा है। जहां 47 एकड़ जमीन पर 672 परिवारों के घरों के पुनर्विकास के लिए साल 2007 में सोसायटी द्वारा महाराष्ट्र हाउसिंग डेवलपमेंड अथॉरिटी (म्हाडा) और गुरू कंस्ट्रक्शन कंपनी के बीच करार हुआ था। जिसके तहत साढ़े तीन हजार से ज्यादा फ्लैट बनाए जाने थे। फ्लैट बनन के बाद शेष जमीन प्राइवेट डेवलपर्स को बेचनी थी। आरोप है कि कंपनी ने महाराष्ट्र हाउसिंग डेवलपमेंड अथॉरिटी को गुमराह किया और पात्रा चॉल की एफएसआई 9 अलग-अलग बिल्डरों को बेच कर 901 करोड़ रुपये जमा किए। बाद में मिडोज नामक एक नया प्रोजेक्ट शुरू कर फ्लैट बुकिंग के नाम पर 138 करोड़ रुपये वसूले गए और 672 लोगों को उनका मकान नहीं दिया गया। बाद में आरोप लगे कि 1039.79 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। साल 2018 में महाराष्ट्र हाउसिंग डेवलपमेंड अथॉरिटी ने गुरू कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।

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