Mumbai News: मुंबई की अदालत में 'सास-बहू ड्रामा', नौकरी को लेकर हुए घरेलू विवाद में कोर्ट का अहम फैसला

Mumbai News: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मुंबई के एक पारिवारिक विवाद से जुड़े मामले में पति और सास समेत पांच आरोपियों को राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान बहू को नौकरी छोड़ने की सलाह देना अपने आप में 'क्रूरता' (Cruelty) नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि जॉब नहीं करने की सलाह देना स्वास्थ्य आधार पर था।

यह मामला उस महिला की शिकायत से जुड़ा है, जिसने आरोप लगाया था कि बेटी के जन्म के बाद उसके साथ मारपीट की गई और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। महिला ने यह भी दावा किया था कि उस पर नौकरी छोड़ने का दबाव डाला गया और उसे अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ा।

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Mumbai News: नौकरी छोड़ने की सलाह पर अहम टिप्पणी

हालांकि, मुलुंड स्थित मजिस्ट्रेट कोर्ट में सुनवाई के दौरान एन. जी. व्यास ने स्पष्ट किया कि सास द्वारा बहू को गर्भावस्था के दौरान नौकरी छोड़ने की दी गई सलाह को जबरदस्ती या दबाव के रूप में नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि महिला को केवल यात्रा से बचने और स्वास्थ्य का ध्यान रखने के उद्देश्य से यह सलाह दी गई थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि एफआईआर में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि बहू पर नौकरी छोड़ने के लिए दबाव डाला गया था या उसे मजबूर किया गया था।

Mumbai Court की टिप्पणी, 'परिवार में गलतफहमियां होना आम'

इसके साथ ही अदालत ने यह टिप्पणी भी की कि पारिवारिक जीवन में अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर गलतफहमियां हो जाती हैं, जो विवाद का रूप ले लेती हैं। महिला ने अपने आरोपों में कहा था कि बेटी के जन्म के बाद उसके साथ भेदभाव किया गया और पति द्वारा मारपीट व अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, उसने ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों पर भी उसे परेशान करने और झगड़े के लिए उकसाने के आरोप लगाए थे।

10 साल से चल रहा था केस

इस मामले की शुरुआत करीब एक दशक पहले हुई थी। दंपती की शादी मई 2010 में हुई थी, जबकि महिला ने 2015 में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 498A और धारा 34 के तहत केस दर्ज किया था। अदालत ने सभी तथ्यों और सबूतों का विश्लेषण करने के बाद पांचों आरोपियों को क्रूरता के आरोप से बरी कर दिया। इस फैसले को पारिवारिक विवादों में 'क्रूरता' की परिभाषा को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

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