Mumbai Metro: मेट्रो लाइन-3 तैयार कर रहा अंडरग्राउंड नेटवर्क, जानें यात्रियों को कैसे मिलेगा फायदा?
Mumbai Metro: मुंबई शहर के व्यस्त और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में पैदल चलना किसी जंग से कम नहीं है। आम तौर पर यात्रियों के लिए कुछ मीटर की पैदल यात्रा भी सड़कों पर ट्रैफिक के भारी दबाव की वजह से मुश्किल है। मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (MMRC) ने शहर के सबसे व्यस्त इलाकों वर्ली और बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में पैदल चलनेवालों की सुविधा बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। एमएमआरसी ने 3 किमी लंबे अंडरग्राउंड पैदल सुरंग निर्माण का प्रस्ताव रखा है।
एमएमआरसी (MMRC) ने साल 2030 तक करीब 3 किलोमीटर लंबे भूमिगत पैदल सुरंगों (Underground Pedestrian Tunnels) के निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। यह पूरी तरह से भूमिगत मेट्रो लाइन-3 (Aqua Line) के प्रमुख स्टेशनों को आसपास के अहम सार्वजनिक स्थलों से जोड़ेंगे। आम यात्रियों के अलावा पर्यटकों के लिए भी यह बेहतरीन सुविधा होगी।

Metro Line-3 के यात्रियों को मिलेगी सुविधा
- नई निविदा (RFP) के मुताबिक तीन बड़े भूमिगत कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इनका उद्देश्य लोगों की आवाजाही को आसान बनाना, खराब मौसम (बारिश-तेज धूप) में यात्रियों को सुविधाजनक विकल्प देना और सड़क पर मौजूद भीड़ को कम करना है।
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- प्रस्तावित तीन सुरंगों में से सबसे लंबी 1.4 किलोमीटर की सुरंग BKC में बन रही है। यह कॉरिडोर मेट्रो लाइन-3 स्टेशन को सीधे मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन टर्मिनल) से जोड़ेगा।
- यह सुरंग टाटा कॉलोनी के रास्ते बनेगी और एक ऑल-वेदर वॉकवे की तरह काम करेगी। इससे यात्री बाहर निकले बिना ही मेट्रो से बुलेट ट्रेन में जा सकेंगे।
Mumbai Metro को अहम सेंटर से जोड़ेगी पैदल चलनेवाली सुरंग
- अब तक के प्लान के मुताबिक, वर्ली में दो नई पैदल सुरंगें साइंस सेंटर स्टेशन से दो अंडरग्राउंड कनेक्टिविटी कॉरिडोर तैयार किए जा रहे हैं।
- 1.1 किमी लंबी सुरंग - वर्ली प्रोमेनेड तक जाएगी। यह सुरंग महालक्ष्मी रेसकोर्स के नीचे से गुजरेगी और सीधे वर्ली प्रोमेनेड तक पहुंचा देगी। इससे पर्यटन स्थल और समुद्री किनारे तक पैदल पहुंचना बेहद आसान होगा।
500 मीटर की सुरंग-नेहरू प्लानेटोरियम की ओर यह छोटा कॉरिडोर सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों वाले क्षेत्र तक पहुंचाएगा। इससे सड़क पर वाहनों का दबाव भी कम होगा।
MMRC ने बताया पूरा प्लान
एमएआरसी के प्लानिंग डायरेक्टर आर. रमन्ना ने बताया कि ये भूमिगत वॉकवे यात्रियों को सुरक्षित, खराब मौसम में भी पैदल जाने का वैकल्पिक रास्ता देंगे। साथ ही, रास्तों पर भीड़ भी कम होगी। इससे कम दूरी के लिए लोगों को ऑटो-टैक्सी या गाड़ी निकालने की जरूरत नहीं होगी। सड़कों पर ट्रैफिक भी कम होने की उम्मीद है। मेट्रो से बुलेट ट्रेन तक यात्री आसानी से ट्रांजिट कर सकेंगे। बड़े सार्वजनिक स्थलों को जोड़ने वाला सुरक्षित नेटवर्क तैयार होगा।
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