'मणिपुर में स्थिति चिंताजनक, सरकार को निर्णय लेने की जरूरत', RSS की बैठक में इन मुद्दों हुई चर्चा
महाराष्ट्र के पुणे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक का शनिवार को समापन हो गया। संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने मणिपुर हिंसा को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि मणिपुर में स्थिति चिंताजनक है। लेकिन, सरकार को निर्णय लेने की जरूरत है क्योंकि संघर्ष दो समुदायों के बीच है।
वैद्य ने कहा कि मणिपुर में स्थिति तनावपूर्ण है और हमारे स्वयंसेवकों ने बैठक में हमें यही बताया। हम सभी अपना काम कर रहे हैं। लेकिन, कुकी और मैतेई समुदायों के बीच जो संघर्ष है, उसके लिए सरकार को निर्णय लेना होगा। आरएसएस के काम के हिस्से के रूप में, हमारे स्वयंसेवक दोनों समूहों के संपर्क में हैं और दोनों के लिए सेवा कार्य किया जा रहा है।

बीजेपी के काम का मूल्यांकन कैसे करता है आरएसएस ?
इस सवाल का जवाब देते हुए कि आरएसएस 2014 से संघ के 36 सहयोगियों में से एक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के काम का मूल्यांकन कैसे करता है? वैद्य ने कहा कि 2014 मई में एक अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्र में छपे एक विचार अंश की एक पंक्ति उद्धृत की। वैद्य ने कहा कि 16 मई, 2014 को संसद के नतीजे घोषित किये गये। 18 मई को, द गार्जियन अखबार में एक संपादकीय छपा, जिसकी पहली पंक्ति थी - 'आज, 18 मई, 2014, इतिहास में उस दिन के रूप में दर्ज किया जा सकता है, जब ब्रिटेन ने आखिरकार भारत छोड़ दिया।' यह बहुत कुछ कहता है।
उन्होंने कहा कि 2014 के बाद भारत धीरे-धीरे अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ दुनिया में उभरने लगा था। उन्होंने कहा कि विदेश, रक्षा और शिक्षा नीतियों में बड़े बदलाव हुए हैं, जिसकी बाकी दुनिया उम्मीद कर रही है।वैद्य ने कहा कि जो कुछ गलत हुआ है। उसे सुधारने में कम से कम 25-30 साल और लगेंगे।
'इंडिया और भारत' नामकरण विवाद पर कहा...
हाल ही में उठे 'इंडिया और भारत' नामकरण विवाद पर बोलते हुए वैद्य ने कहा कि दुनिया में किसी भी देश के दो नाम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत नाम का सभ्यतागत मूल्य है और यही कारण है कि इसे केवल भारत ही होना चाहिए।
आरक्षण मुद्दे पर भी वैद्य ने पेश किया अपना रूख
आरक्षण पर आरएसएस के रुख पर टिप्पणी करते हुए वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि भारत में अनुसूचित जाति (एससी)/अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लोग दशकों से सम्मान, सुविधाओं और शिक्षा से वंचित थे। उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए संविधान के अनुसार जो भी आरक्षण है, दिया जाना चाहिए। साथ ही इस सामाजिक असमानता को दूर करने के प्रयास भी किये जाने चाहिए। बाकी सभी प्रकार के आरक्षण राजनीतिक हैं।
बैठक में 36 विभिन्न संगठनों के 246 प्रतिनिधि उपस्थित रहे
बैठक में चर्चा किए गए मुख्य मुद्दों पर विस्तार से बताते हुए वैद्य ने कहा कि बैठक में 36 विभिन्न संगठनों के 246 प्रतिनिधि उपस्थित थे। वे सभी इस बात पर सहमत थे कि किसी भी समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार में महिलाओं की भूमिका सबसे प्रमुख होती है।
समाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, जो सराहनीय है। इस संदर्भ में बैठक में संघ की शताब्दी योजना के तहत महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा की गई। महिलाओं की अधिक भागीदारी के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, हमने 2025 तक देश भर में 211 सम्मेलन आयोजित करने का लक्ष्य रखा है। अब तक, 12 प्रांतों में 73 ऐसे सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं, जिन्हें अच्छी प्रतिक्रिया मिली है, जिसमें 1.23 लाख से अधिक महिलाओं ने भाग लिया है।












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