Maharashtra:सवालों के घेरे में डॉक्टर सुसाइड केस! 'कार्रवाई में देरी' ने ली महिला की जान? परिजनों ने उठाए सवाल
Maharashtra Doctor Suicide Case: सतारा जिले में एक महिला डॉक्टर की आत्महत्या मामले में नए तथ्य सामने आए हैं। महाराष्ट्र पुलिस ने शनिवार को बताया कि अगर डॉक्टर की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होती, तो उनकी जान बचाई जा सकती थी।
डॉक्टर ने अपने हाथ पर मराठी में लिखा था कि उप-निरीक्षक गोपाल बडणे और अन्य एक व्यक्ति ने उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी। जानिए पूरे केस में क्या है पूरा मामला? कैसे इस पूरे केस में पूरा पुलिस-प्रशासन सवालों के घेरे में है....

क्या है पूरा मामला?
29 वर्षीय महिला डॉक्टर सतारा जिले के फळटण क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में अनुबंध पर तैनात थीं। उन्हें गुरुवार रात एक होटल के कमरे में फांसी पर लटका पाया गया। पुलिस के अनुसार, डॉक्टर ने अपने हाथ पर एक नोट में दो व्यक्तियों के नाम दर्ज किए थे। इस मामले में डॉक्टर द्वारा अंकित एक व्यक्ति, प्रशांत बंकार, को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वह डॉक्टर के अनुसार उनके मकान मालिक का बेटा है।
चार पन्नों का सुसाइड नोट
डॉक्टर ने चार पन्नों का सुसाइड नोट भी लिखा था। इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी उन्हें झूठे फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के लिए दबाव डालते थे। कई मामलों में आरोपियों को अस्पताल में जांच के लिए लाया भी नहीं जाता था। जब डॉक्टर ने इन झूठे सर्टिफिकेट जारी करने से मना किया, तो उप-निरीक्षक गोपाल बडणे और अन्य अधिकारियों ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया।
सुसाइड नोट में यह भी उल्लेख था कि एक सांसद और उसके दो व्यक्तिगत सहायक डॉक्टर पर दबाव डाल रहे थे। डॉक्टर ने बताया कि जब उन्होंने झूठा सर्टिफिकेट जारी करने से इनकार किया, तो सांसद के सहायक अस्पताल में आए और डॉक्टर को फोन पर सांसद से बात कराई। सांसद ने उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से धमकी दी।
पुलिस ने जताई संवेदना
सतारा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वैषाली कडुसकर ने कहा, "अगर उस महिला डॉक्टर की शिकायत पर समय पर कार्रवाई होती या उन्होंने किसी को अपनी परेशानी बताई होती, तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। एक महिला पुलिस अधिकारी होने के नाते इस घटना से मैं अत्यंत आहत और दुखी हूं।"
परिवार ने भी लगाए गंभीर आरोप
डॉक्टर के चचेरे भाई ने भी आरोप लगाया कि पुलिस और राजनीतिक दबाव के कारण डॉक्टर को झूठे मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के लिए मजबूर किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि डॉक्टर ने जून-जुलाई में स्थानीय उप-मंडल पुलिस अधिकारी (SDPO) को शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें तीन पुलिसकर्मियों का नाम शामिल था। हालांकि सतारा पुलिस ने कहा कि जून में दर्ज शिकायत का मामला अलग विषय से संबंधित था।
डॉक्टर की आत्महत्या के बाद पुलिस ने उप-निरीक्षक गोपाल बडणे और प्रशांत बंकार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मामले की जांच जारी है और आरोपी पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है। यह मामला राज्य में पुलिस और प्रशासन पर सवाल खड़े करता है। साथ ही, इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप और दबाव के आरोप भी सामने आए हैं। अब देखना यह होगा कि जांच में कितनी पारदर्शिता और न्यायपूर्ण कार्रवाई होती है।
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