फ्लोर टेस्ट कराने पर SC ने की गर्वनर की आलोचना, कहा- पार्टी की कलह में नहीं देना था दखल
Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट केस पर अब सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों वाली बड़ी बेंच फैसला तय करेगी। मामला 5 जजों की पीठ ने ट्रांसफर कर दिया है। जिससे एकनाथ शिंदे-भाजपा सरकार को फौरी राहत मिली है।

Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट मामले पर सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की पीठ किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। अब इसे 7 जजों वाली बड़ी बेंच के पास ट्रांसफर कर दिया गया है। इससे एकनाथ शिंदे-भाजपा सरकार को फौरी राहत मिली है। वहीं, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी भी की है।
कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट कराने पर राज्यपाल की आलोचना की है। कोर्ट ने कहा कि किसी पार्टी के आंतरिक मामले को फ्लोर टेस्ट के जरिए कैसे तय किया जा सकता है। बागी विधायकों पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिवसेना के बागी गुट के विधायकों के प्रस्ताव को सही मानकर महाराष्ट्र के राज्यपाल ने गलती की है।
पार्टी के कलह में राज्यपाल को दखल नहीं देना था
कोर्ट ने कहा कि विधायकों की अयोग्यता पर स्पीकर फैसला लें। न हम इसपर कोई फैसला लेंगे और न ही हम पुरानी स्थिति को बहाल कर सकते हैं। क्योंकि उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया और अपना इस्तीफा दे दिया। इसलिए सबसे बड़े दल बीजेपी के समर्थन से एकनाथ शिंदे को शपथ दिलाना राज्यपाल द्वारा उचित ठहराया गया। सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव ठाकरे को राहत देने से इनकार कर दिया, क्योंकि यह देखा गया कि उन्होंने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया। फ्लोर टेस्ट कराने से पहले राज्यपाल को सलाह लेनी चाहिए थी। पार्टी के कलह में राज्यपाल को दखल नहीं देना चाहिए था।












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