क्या सत्ता में वापसी के लिए महाराष्ट्र में चलेगा भाजपा का ये फार्मूला?
मुंबई, 22 जून। गैर भाजपा शासित राज्य जहां पर भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने की थोड़ी-बहुत संभावना रहती है, वहां पार्टी लगातार इस कोशिश में रहती हैं कि वह किस तरह से अपने सियासी गणित को साध सके। भाजपा 24*7 की राजनीति में भरोसा रखने वाली पार्टी है, वह अंदरखाने उन संभावनाओं को तलाशती रहती है जिससे सरकार बना सके। इसके लिए पार्टी इन दलों के भीतर की कमजोर कड़ी पर पैनी नजर रखती है, जिसके जरिए वह सत्ता में वापसी कर सके। कई राज्यों में भारतीय जनता पार्टी ने इसमे सफलता भी पाई है।

सरकार बनाने के विकल्प
महाराष्ट्र से पहले मध्य प्रदेश में भी पार्टी ने इसी तरह की रणनीति अपनाई थी। वर्ष 2020 में कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर सरकार बनाने में सफलता हासिल की। हालांकि राजस्थान में पार्टी की यह कोशिश सफल नहीं हो सकी क्योंकि यहां दोनों दलों के बीच सीटों का अंदर बड़ा था। लेकिन महाराष्ट्र में पार्टी उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महाविकास अघाड़ी की सरकार में फूट के भीतर सत्ता वापसी की राह देख रही है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में भाजपा ने सत्तारूढ़ दल के भीतर दरार को बढ़ाने की कोशिश की। कुछ इसी तरह की कोशिश हिंदुत्व विचारधारा के दम पर पार्टी महाराष्ट्र में शिवसेना को कोर वोटर को साधने में लगी है।

कमजोर कड़ी की तलाश
मध्य प्रदेश में भाजपा ने कांग्रेस के भीतर आंतरिक फूट का फायदा उठाते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपने पाले में लाने में सफलता हासिल की तो महाराष्ट्र में पार्टी एकनाथ शिंदे के जरिए सत्ता वापसी की राह देख रही है। मध्य प्रदेश में सिंधिया कमलनाथ से नाराज थे क्योंकि कमलनाथ मुख्यमंत्री रहते प्रदेश पार्टी के अध्यक्ष भी थे। यही वजह है कि सिंधिया कांग्रेस सरकार द्वारा अधूरे वादों को लेकर निशाना साधते रहे। भाजपा के साथ सिंधिया के परिवार का पुराना रिश्ता रहा है और इसका फायदा सिंधिया को भाजपा में लाने में भी मिला और कमलाथ की सरकार प्रदेश में गिर गई।

राजस्थान-मध्य प्रदेश पार्टी की नीति
राजस्थान की बात करें तो यहां अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच संबंध कुछ खास नहीं रहे हैं। मध्य प्रदेश जैसी ही स्थिति राजस्थान में भी थी। सचिन पायलट को जब मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं मिली तो वह बगावती सुर में दिखे। लेकिन यहां भाजपा को सफलता इसलिए नहीं मिल सकी क्योंकि भाजपा और कांग्रेस के बीच सीटों का अंतर काफी बड़ा था। यही वजह है कि सचिन पायलट कांग्रेस के साथ ही रहे और एक बार वह फिर से इस भरोसे का इंतजार कर रहे हैं कि अगर भाजपा उन्हें मुख्यमंत्री पद देने का वादा करे तो वह कांग्रेस का साथ छोड़ दें।

शिंदे के जरिए सत्ता की चाभी
एकनाथ शिंदे की बात करें तो वो भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की कुर्सी को देख रहे हैं। उद्धव ठाकरे से पहले वह प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखते थे। लेकिन वह एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन के बिल्कुल इच्छुक नहीं थे। भाजपा ने शिंदे के साथ के अपने पुराने संबंध का इस्तेमाल किया। दरअसल शिंदे ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ काम कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी को उनपर भरोसा है कि वह महाविकास अघाड़ी की सरकार को तोड़ सकते हैं।

हिंदुत्व के मुद्दे पर शिवसेना पर निशाना
विपक्ष में भाजपा लगातार शिवसेना पर निशाना साधती रही है, वह हिंदुत्व के मुद्दे को लेकर शिवसेना को आड़े हाथ लेती रहती है। पार्टी ने शिवसेना पर आरोप लगाया कि उसने बाल ठाकरे की विचारधारा को त्याग दिया और सत्ता की लालच में कांग्रेस व एनसीपी के साथ गठबंधन कर लिया। यहां यह गौर करने वाली बात है कि ईडी राहुल गांधी से पिछले कुछ दिों से लगातार पूछताछ कर रही है। सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी को नेशनल हेराल्ड केस में गिरफ्तार किया जा सकता है। बहरहाल महाराष्ट्र में कांग्रेस सत्ता बचाने की पूरी कोशिश में जुटी है और इसका जिम्मा कमलनाथ को दिया गया है।

छत्तीसगढ़ और झारखंड का अगला नंबर!
जिस तरह से इन अलग-अलग राज्यों में भाजपा ने सत्ता में वापसी की रणनीति बनाई उसके बाद छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी खतरे के बादल मंडरा सकते हैं। भाजपा को बतौर राजनीतिक दल बेहद सक्रिय पार्टी के रूप में जाना जाता है और वह सरकार बनाने के विकल्प की तलाश करती रहती है। बहरहाल देखने वाली बात यह है कि क्या महाराष्ट्र में भाजपा जोकि सबसे बड़ी पार्टी है क्या सत्ता में फेरबदल करने में सफल होती है।












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