प्याज के निर्यात शुल्क के विरोध कर रहे महाराष्ट्र के किसानों को मिला भाजपा समर्थकों का साथ
निर्यात शुल्क के विरोध में प्याज किसानों के साथ भाजपा सहयोगी भी शामिल, सरकार ने नुकसान नियंत्रण की कोशिश की
महाराष्ट्र भारत का सबसे बड़ा प्याज का उत्पादक और निर्यात करने वाला राज्य है। केंद्र सरकार द्वारा प्याज के निर्यात पर 40 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाए जाने पर महाराष्ट्र के किसान आग-बबूला हो चुके हैं। राज्य के गुस्साएं किसानों ने केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है, अब किसानों को भाजपा के समर्थकों का भी साथ मिल चुका है। जिसके बाद दिल्ली की केद्र सरकार और मुंबई सत्तारूढ़ गठबंधन डैमेज कंट्रोल के लिए संघर्ष करने में जुट चुकी है।

भाजपा सहयोगी संगठन ने दी है ये चेतावनी
निर्यात शुल्क लगाए जाने के विरोध में अब भाजपा सहयोगी रयत क्रांति संगठन भी किसानों के इस आंदोलन में शामिल हो चुका है। ये पूर्व मंत्री सदाभाऊ खोत के नेतृत्व वाला एक कृषि संगठन है। संगठन के नासिक प्रमुख दीपक पगार ने धमकी दी है कि अगर सरकार अगले दो दिनों में फैसला वापस नहीं लेती है तो वे मुंबई तक ट्रैक्टर रैली शुरू करेंगे इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला गलत है।
बता दें NAFED (राष्ट्रीय सहकारी कृषि विपणन महासंघ) द्वारा मंगलवार से प्याज की खरीद फिर से शुरू करने की घोषणा थी।
महाराष्ट्र डिप्टी सीएम ने केंद्र से की थी बात
हालांकि प्याज के निर्यात पर 40 प्रतिशत शुल्क की बढा़ेत्तरी के केंद्र सरकार के फैसले के बार महाराष्ट्र के किसानों के विरोध के बार में राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से बात भी की थी।
सरकार खरीदेगी किसानों से प्याज
केंद्रीय मंत्री ने बताया था कि किसानों को राहत देने और उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार ने किसानों से प्याज खरीदने का निर्णय लिया है, जिसके लिए नासिक और अहमदनगर में खरीद केंद्र खोले जाएंगे। सरकार राज्य के किसानों से 2410 रुपये प्रति क्विंटल की दर से दो लाख मैट्रिक टन प्याज खरीदेगी।
विरोध में नासिक व्यापारियों ने शुरू की हड़ताल
वहीं प्याज के निर्यात पर 40 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने बाद प्याज उत्पादक किसान केंद्र सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़के के लिए आमादा हो चुके हैं। नासिक के व्यापारियों और कमीशन एजेंटों ने निर्यात शुल्क की बढ़ोत्तरी के विरोध में सोमवार को ही हड़ताल शुरू कर दी है। इसके अलावा प्याज की नीलामी पर रोक लगा दी है। वहीं कई कृषि संगठन भी केंद्र सरकार के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। किसानों की नाराजगी इसलिए भी अधिक है क्योंकि केंद्र का फैसला ठीक तब आया जब महीनों की मंदी के बाद प्याज की कीमतें ठीक हो गई थीं।
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