Maharashtra Elections: चुनाव के समय फिर से क्यों उठा सिंचाई 'घोटाले' का मामला?

Maharashtra Chunav: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पिछले दो चुनावों की तरह ही एक बार फिर से कथित 70,000 करोड़ रुपए के सिंचाई घोटाले का जिन्न बाहर आ गया है। मजेदार बात ये है कि इस बार इस मुद्दे को किसी और ने नहीं, बल्कि खुद उपमुख्यमंत्री और एनसीपी चीफ अजित पवार ने उछाला है, जो इसकी वजह से विवादों में रहे हैं।

महाराष्ट्र के सांगली जिले के तासगांव विधानसभा सीट पर एक रैली के दौरान अजित पवार ने कहा कि सैलरी और अन्य लागत समेत भी ये प्रोजेक्ट कुल 43,000 करोड़ रुपए का था। ऐसा कहकर उन्होंने इसे 70,000 करोड़ रुपए का घोटाला बताए जाने का मजाक उड़ाने की कोशिश की।

maharashtra elections

अजित पवार ने अपने ही पूर्व सहयोगी पर लगाया आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के तत्कालीन गृहमंत्री आरआर पाटिल इन आरोपों के पीछे थे। उन्होंने दावा किया कि एंटी-करप्शन ब्यूरो से जांच शुरू करने का आदेश देकर उन्होंने इन आरोपों को हवा देने का काम किया। पवार ने यहां तक कह दिया कि 'आरआर पाटिल ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा।' तब पाटिल और पवार दोनों ही संयुक्त एनसीपी में हुआ करते थे।

महाराष्ट्र का ये सिंचाई घोटाला क्या है?
2009 से 2014 के बीच अजित पवार कुछ समय के लिए महाराष्ट्र के सिंचाई के साथ-साथ जल संसाधन मंत्री भी रहे। वे विदर्भ सिंचाई विकास निगम के चेयरमैन भी थे। 2012 के इकोनॉमिक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 10 वर्षों में विभिन्न सिंचाईं परियोजनाओं पर 70,000 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद महाराष्ट्र की सिंचाई क्षमता में मात्र 0.1% की बढ़ोतरी हुई।

जल संसाधन विभाग के एक रिटायर्ड चीफ इंजीनियर विजय पंधारे और कुछ अन्य एक्टिविस्ट ने आरोप लगाया कि अजित पवार ने विदर्भ सिंचाईं विकास निगम की गवर्निंग काउंसिल की मंजूरी के बिना ही 38 प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी। बवाल मचलने के बाद तब पवार को डिप्टी सीएम पद छोड़ना पड़ा। लेकिन तीन महीने बाद ही उनकी वापसी हो गई।

अजित पवार ने अब इस तरह का दावा क्यों किया?
उस समय इस मामले की वजह से कांग्रेस और एनसीपी में तल्खी इतनी बढ़ गई थी कि सितंबर 2014 में एनसीपी ने कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया। तब कहा गया कि विधानसभा चुनावों में दोनों दलों के बीच सीट बंटवारा नहीं हो पाया, इसलिए वे अलग हो गए।

अजित पवार की अगुवाई में एनसीपी पहला विधानसभा चुनाव बीजेपी की अगुवाई में लड़ रही है। तासगांव में पवार ने कहा कि जब 2014 में बीजेपी विधानसभा चुनाव जीती और देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने पाटिल के हस्ताक्षर वाली वह फाइल दिखाई, जिसमें उनके खिलाफ जांच शुरू करने की सिफारिश की गई थी।

कांग्रेस के तत्कालीन सीएम का स्टैंड?
जैसे ही पवार ने पाटिल को लपेटा, तब के कांग्रेसी मुख्यमंत्री और पार्टी नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि वह निर्दोष साबित हुए, जिसकी वजह से एनसीपी ने उनकी सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। उन्होंने कहा, 'मैंने अजित पवार के खिलाफ जांच शुरू करने का आदेश कभी नहीं दिया था। आरआर पाटिल की ओर से जांच शुरू किए जाने के आदेश वाली फाइल मुझ तक कभी नहीं पहुंची। दुर्भाग्य से एनसीपी और अजित पवार ने मुझे जिम्मेदार मान लिया और सरकार गिरा दी।'

चव्हाण ने यह भी कहा है कि अच्छा है कि पवार ने खुद मामले को साफ कर दिया है। उनके मुताबिक, 'मैंने तो इकोनॉमिक सर्वे रिपोर्ट पर जिर्फ श्वेत पत्र की मांग थी।'

सिंचाई घोटाले की जांच का आगे क्या हाल हुआ?
2019 में शिवसेना ने बीजेपी के साथ चुनाव जीतने के बाद एनसीपी और कांग्रेस से हाथ मिला लिया और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बन गए। अजित पवार इस महा विकास अघाड़ी सरकार में उपमुख्यमंत्री बने और शुरुआत में ही एंटी-करप्शन ब्यूरो ने कथित घोटाले में उनको क्लीनचिट दे दी।

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में सौंपे गए हलफनामे में ब्यूरो ने इस कथित घोटाले में अजित पवार के शामिल होने के आरोपों को खारिज कर दिया।

जब उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई और शिवसेना टूट गई तो उसके कुछ समय बाद अजित पवार भी अपने चाचा की एनसीपी तोड़कर महायुति सरकार में शामिल हो गए और फिर से उसी तरह से डिप्टी सीएम का पद संभाल लिया, जैसे एमवीए सरकार में थे।

अब उद्धव की शिवसेना का अजित पवार के बारे में क्या कहना है?
बुधवार को शिवसेना (यूबीटी) के नेता और सांसद संजय राउत ने कहा कि फडणवीस और पवार दोनों के खिलाफ गोपनीयता के शपथ के उल्लंघन के लिए केस दर्ज होने चाहिए।

वे बोले, 'अजित पवार ने कहा कि फडणवीस ने उन्हें एक आधिकारिक फाइल दिखाई, जिसपर आरआर पाटिल ने हस्ताक्षर किया था। ऐसा करके फडणवीस ने गोपनीयता की शपथ तोड़ी है। ऐसे मामले पर सार्वजनिक तौर पर कैसे चर्चा की जा सकती है। गवर्नर को फडणवीस और पवार के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश देना चाहिए।'

इसे भी पढ़ें- Maharashtra Elections 2024: मुस्लिम वोट के पांच दावेदार! किसे लग सकता है तगड़ा झटका?

दरअसल, अजित पवार ने तासगांव में यह मसला इसलिए उठाया, क्योंकि पाटिल इसी सीट से 6 बार विधायक चुने गए थे। राज्य के डिप्टी सीएम भी रह चुके पाटिल स्वच्छ छवि और जनता से जुड़े नेता के तौर पर जाने जाते थे। फरवरी 2015 में उनका निधन हो गया था।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+