Maharashtra Chunav: क्या है Manoj Jarange प्लान, जिससे महायुति का खेल खत्म करने की हो गई तैयारी?

Maharashtra Chunav 2024: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलनकारी अब खुलकर चुनावी मैदान में उतर आए हैं। इस आंदोलन के अगुवा मनोज जरांगे चुनाव तारीखों की घोषणा के साथ ही कोटा की मांग से आगे निकलकर चुनावी समीकरण बिठाने में जुट गए हैं। उन्होंने सत्ताधारी महायुति गठबंधन को हराने के लिए मराठा, दलित और मुसलमान वोटरों को गोलबंद करने की तैयारी शुरू कर दी है।

मनोज जरांगे की शिकायत है कि चुनाव तारीखों की घोषणा होने तक सत्ताधारी गठबंधन ने मराठा समुदाय को ओबीसी के तहत आरक्षण देने का एलान नहीं किया, इसलिए वह इन चुनावों में महायुति के उम्मीदवारों को हराने के लिए वोटरों को एकजुट करेंगे और 20 अक्टूबर को अपनी कार्य योजना को सार्वजनिक कर देंगे।

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ओवैसी की पार्टी के नेता से भी डील कर चुके हैं मनोज जरांगे!
जरांगे ने स्पष्ट किया है कि वह बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी (महायुति) गठबंधन के खिलाफ मराठा वोटरों को तो गोलबंद करेंगे ही, मुस्लिम और दलित समुदाय के लोगों को भी इकट्ठा करेंगे। इस योजना के तहत वे मंगलवार को असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के सांसद इम्तियाज जलील से जालना में मुलाकात भी कर चुके हैं। मतलब, जरांगे अपनी चुनावी मंसूबे को धार देने में पहले ही जुटे हुए हैं।

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महायुति के खिलाफ मराठा आंदोलनकारी का मास्टर प्लान!
मनोज जरांगे ने कहा है, 'हमारा आंदोलन पूरे मराठा समुदाय को आरक्षण दिलाने के लिए था, लेकिन आचार संहिता लागू हो चुकी है, हमारी मांग पर कोई फैसला नहीं हो सकता। इसलिए, अब मैं आरक्षण के बारे में बिल्कुल ही बात नहीं कर रहा। बजाए इसके मैं मराठा समुदाय को एकजुट करूंगा कि वे उनके खिलाफ वोट दें, जिन्होंने सिर्फ झूठे वादे किए और कभी आरक्षण नहीं दिया।'

वे मराठा समुदाय से भारी तादाद में मतदान की अपील करते हुए कहते हैं, 'इस चुनाव में समुदाय को अपनी एकता दिखाना ही होगा। इस बार किसी खास उम्मीदवार को वोट देने के बजाए, अपने समाज के हित के लिए वोट करना होगा। हर योग्य मराठा वोटर मताधिकार का इस्तेमाल करे, ताकि हम उन्हें घर भेज सकें, जो हमारी भावनाओं के साथ खेल रहे हैं।'

मराठा, मुस्लिम और दलित वोटरों के दम पर महायुति को हराने की योजना
मराठा आंदोलनकारी का दावा है कि अगर मराठा, मुस्लिम और दलित मिल जाएं तो राज्य का राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। दिलचस्प बात ये है कि जरांगे महायुति के खिलाफ विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) का खुलकर समर्थन देने को लेकर अपने पत्ते अभी नहीं खोल रहे हैं; और उम्मीदवार चुनने के लिए लोगों से आवेदन मंगवाकर खुद की राजनीति शुरू करने का भी संकेत दे रहे हैं।

उनके मुताबिक उन्हें उम्मीदवार बनने के लिए करीब 800 आवेदन मिले हैं, जिसपर 20 अक्टूबर को फैसला लिया जाएगा।

महाराष्ट्र में मराठा बनाम ओबीसी होने का संकेत!
लेकिन, जरांगे के सियासी मंसूबों के बीचे ओबीसी कार्यकर्ता भी सक्रिय हो चुके हैं। ओबीसी ऐक्टिविस्ट लक्ष्मण हाके ने कहा है, 'हमारी लड़ाई, हमारे आरक्षण को बचाने के लिए है। जरांगे चाह रहे हैं कि वह सरकार पर दबाव बनाकर मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी के तहत ले आएं, जो हम नहीं होने देंगे। इसलिए अपने एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए जरांगे जहां भी रैली करेंगे, उनके खिलाफ हम भी ओबीसी को एकजुट करन के लिए वैसी ही रैली करेंगे।'

इस तरह से इस बार के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जहां एक तरफ मराठा, मुसलमान और दलितों की गोलबंदी के लिए चुनावी बिसात बिछाई जा रही है, तो उसे टक्कर देने के लिए गैर-मराठा ओबीसी समुदाय को गोलबंद करने की भी रणनीति तैयार हो चुकी है। यह दो तरह की गोलबंदी आखिर किसके लिए फायदेमंद साबित होती है, इसके हरियाणा की तरह ही अंतिम चुनाव परिणाम का ही इंतजार करना होगा।

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