Maharashtra Chunav: कैसे 'बड़ा भाई' बनने के मंसूबे पर फिरा पानी, शरद पवार के पावर से चित हुई कांग्रेस?

Maharashtra Election 2024: महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (MVA) के सहयोगी दलों के बीच जिस तरह से सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला निकाला गया है, उससे साफ है कि तीनों प्रमुख दलों, कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एससीपी) की हैसियत समान मानी गई है। गठबंधन में कोई बड़ा भाई या छोटा भाई नहीं है। यह सीधे तौर पर कांग्रेस के लिए चुनाव से पहले ही गठबंधन के भीतर से ही बहुत बड़ा झटका है।

जब महा विकास अघाड़ी के दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही थी और कांग्रेस पार्टी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं के बीच तल्खी नजर आ रही थी, तब कांग्रेस के प्रवक्ता टीवी चैनलों पर चीख-चीख कर अपनी पार्टी को 'बड़ा भाई' साबित करने में लगे हुए थे।

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शरद पवार ने किया एमवीए के सीटों पर 'फैसला'!
तब भी शिवसेना (यूबीटी) के नेता कांग्रेस के दावे को मानने के लिए राजी नहीं थे और आखिरकार शरद पवार ने जो 'फैसला' सुनाया है, उससे तो यह बात जग-जाहिर ही हो गई है। महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों में से 15 सीटों पर एमवीए में अभी भी स्थिति साफ नहीं है। बाकी 273 सीटों का बंटवारा कर दिया गया है।

इसमें कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एससीपी) को 85-85-85 सीटें दी गई हैं। 18 सीटें छोटे-छोटे सहयोगी दलों के लिए छोड़ी गई हैं। जानकारी के मुताबिक जिन 15 सीटों पर अभी भी कोई सुलह वाला फॉर्मूला नहीं निकला है, उनमें से 3 मुंबई की और 12 विदर्भ क्षेत्र की सीटें हैं।

कांग्रेस की उम्मीदों के लिए बड़ा झटका
इस फॉर्मूले को लेकर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि इसे पार्टी के लिए बहुत बड़े झटके की तरह देखा जा रहा है। क्योंकि, मंगलवार को अनौपचारिक तौर पर यह तय हो गया था कि कांग्रेस 105, शिवसेना (यूबीटी) 95 और एनसीपी (एससीपी) 84 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

उन्होंने कहा, 'क्योंकि, बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकलता दिख रहा था, कांग्रेस ने कुछ कदम पीछे हटना तय कर लिया और 85 सीटों के लिए मान गई। हमें यकीन है कि हम अपने लोकसभा वाले प्रदर्शन को भी बेहतर करेंगे और हम उम्मीद करते हैं कि बाकी बची 15 सीटों में से भी अतिरिक्त सीटें प्राप्त करेंगे।'

फिर एमवीए के पावर सेंटर साबित हुए शरद पवार!
ताजा फॉर्मूले को लेकर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने जो कुछ कहा है, उससे साफ हो गया है कि इसमें सबसे बड़ी दखलअंदाजी शरद पवार की रही है। उन्होंने कहा है कि उनके दखल से ही सीटों के बंटवारे का काम तेजी से हो सका है, क्योंकि ज्यादातर उम्मीदवार गुरुवार को नामांकन भरने के लिए उतावले हो रहे थे, जो कि एक शुभ दिन है।

255 सीटों का आपसी बंटवारा बुधवार को तभी फाइनल हुआ, जब महराष्ट्र के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले,कांग्रेस विधायक दल के नेता बालासाहेब थोराट, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत और पवार की पार्टी के जयंत पाटिल शरद पवार के साथ हुई बैठक में आपसी सहमति के लिए तैयार हुए।

कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से भी नहीं सुलझ पाया मामला!
दरअसल, एक समय एमवीए में मामला बहुत ही ज्यादा बिगड़ गया था। खासकर राउत और पटोले की बयानबाजी ने सहयोगी दलों में आपसी सहमति की उम्मीद ही धूमिल कर दी थी। प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने पार्टी के दिल्ली दरबार तक आपात संदेश भेजना शुरू कर दिया था। फिर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बालासाहेब को शरद पवार और उद्धव ठाकरे दोनों से मिलकर विवाद दूर करने के काम पर लगाया।

लेकिन, जब थोराट भी अपने मिशन में नाकाम हो गए तो कांग्रेस नेताओं को लगने लगा कि अब एमवीए से निकलकर अकेले चुनाव लड़ने का ही विकल्प बच गया है। बस इसी समय में एमवीए के शिल्पकार शरद पवार 'बिग बॉस' की तरह से कंट्रोल अपने हाथों में लेते हैं।

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सहयोगी दलों को संदेश पहुंचाया जाता है कि अगर बंटे तो महायुति को सत्ता में वापसी से रोकना मुश्किल है। पवार ने अपने 'पावर' का इस्तेमाल करते हुए थोराट और ठाकरे से बात की और सीटें तय करने को कह दिया।

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