Maharashtra Assembly Elections 2024: जानिए उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की नेतृत्व शैली कैसे रही विरोधाभासी?
Maharashtra Assembly Elections 2024: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से पहले राज्य का राजनीतिक माहौल बड़ा ही उठा-पटक वाला रहा, इस दौरान कई बड़े संकट आए और महत्वपूर्ण बदलाव हुए। 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में शिवसेना से उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।
कोविड-19 महामारी की चपेट में आने से ठीक पहले उद्धव ठाकरे ने दिसंबर 2019 में कांग्रेस-एनसीपी के साथ गठबंधन करके मुख्यमंत्री का पदभार संभाला था। उद्धव ठाकरे का कार्यकाल कोविड-19 महामारी की अप्रत्याशित चुनौतियों के साथ हुआ।

इस दौरान त्वरित और निर्णायक उपायों की मांग थी जिसे ठाकरे ने महामारी से संबंधित रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपनाया। हालांकि उनके प्रयास विवादों से मुक्त नहीं थे और उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा।
ठाकरे के सामने आईं ये बड़ी चुनौतियां?
पत्रकार अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी और पालघर साधु की हत्या की घटना और कंगना रनौत जैसी मशहूर हस्तियों के खिलाफ छापेमारी की ऐसी घटनाएं थीं जो सुर्खियां बनी और सरकार पर तलवार लटकी रही। इसके अलावा भ्रष्टाचार के आरोप में अनिल देशमुख की गिरफ्तारी और सचिन वाजे मामले जैसे हाई-प्रोफाइल मामले भी उनकी सरकार के लिए चुनौतियां पैदा कर गए।
ठाकरे की नेतृत्व शैली की हुई जमकर आलोचना
महामारी के बीच रुकी हुई परियोजनाओं के कारण उनकी नेतृत्व शैली की आलोचना हुई। महामारी के दौरान स्वास्थ्य उपायों पर ध्यान केंद्रित करने के कारण विभिन्न पहलों में देरी हुई। इन विवादों और प्रबंधन के मुद्दों ने कार्यालय में ठाकरे के समय को प्रभावित किया।
एकनाथ शिंदे ने सत्ता संभालते ही विकास पर किया फोकस
वहीं उद्धव ठाकरे के ढाई साल सरकार संभाली इसके बाद एकनाथ शिंदे ने ठाकरे के खिलाफ विद्रोह के बाद भाजपा के समर्थन से सत्ता संभाली। उनके शासन ने रुकी हुई विकास परियोजनाओं को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक बदलाव आया।
एकनाथ शिंदे का दृष्टिकोण महामारी प्रबंधन पर तत्काल, जरूरी ध्यान से हटकर विकास और निवेश पर केंद्रित किया। उनका कार्यकाल प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी देने और आर्थिक विकास के लिए अनुकूल माहौल को बढ़ावा देने के लिए अहम रहा है।
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में मुंबई मेट्रो III और मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन जैसी प्रमुख पहलों में तेजी लाई गई। शिंदे ने बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास पर ध्यान केंद्रित किया। शिंदे के नेतृत्व में एक प्रमुख परियोजना मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल है, जो महाराष्ट्र के बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए अहम रही। ये परियोजना क्षेत्र में विकास और निवेश के लिए प्रमुख चालक के रूप में देखा जाता है।












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