Maharashtra Chunav 2024: महाराष्‍ट्र की महाभारत में इन 5 कारणों से महायुति की नैया डुबो सकते हैं अजित पवार?

Maharashtra Chunav 2024 News: महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में महायुति व महा विकास अधाड़ी में सीट बंटवारा होते ही उम्‍मीदवारों की सूचियां धड़ाधड़ जारी हो रही हैं। महायुति में BJP ने पहली सूची में 99, शिंदे शिवसेना ने 45 और आज बुधवार को अजित पवार NCP ने 38 उम्‍मीदवार घोषित कर दिए हैं।

महाराष्‍ट की महाभारत के महायुति गठबंधन में इस बार कुल 288 सीटों में से भाजपा 156, अजित पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) 53-54 और एकनाथ शिंदे शिवसेना 78-80 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। तीनों को मिलकर बहुमत का आंकड़ा 145 सीट हासिल करना है ताकि महाराष्‍ट्र की सत्‍ता में महायुति की वापसी हो सके।

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Maharashtra Chunav 2024 Ajit Pawar

सूत्रों के हवाले से खबर है कि महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में महयुति के घटक दलों के बीच सीट शेयरिंग पर तो बात बन गई है, मगर भाजपा महायुति के अपने सहयोगी अजित पवार एनसीपी को लेकर सुरक्षित महसूस नहीं कर रही। महाराष्‍ट्र की सियायत पर पकड़ रखने वालों का मानना है कि अजित पवार की एनसीपी महायुति गठबंधन के लिए चुनौती साबित हो सकती है। कहा तो यहां तक जा रहा कि अजित पवार महाराष्‍ट्र चुनाव 2024 में महायुति की नैया डुबो सकते हैं। इस दावे के पीछे ये पांच कारण बताए जा रहे हैं।

1. चाचा शरद पवार को दिया धोखा

महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में जनता के सेंटिमेंट शरद पवार के साथ हैं, क्‍योंकि साल 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद अजित पवार अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर नई पार्टी बनाई और सत्‍तारूढ़ गठबंधन महायुति का हिस्‍सा बने। अजित पवार के सियासी दामन पर यही सबसे बड़ा दाग है। जनता में उनकी छवि कुर्सी के लिए उस बुजुर्ग चाचा को धोखा देने वाले अवसरवादी नेता की बन गई, जिसके दम पर भतीजे ने राजनीति की ऊचाइयों को छूआ।

लोकसभा चुनाव 2024 में एनसीपी के गढ़ बारामती में भी अजित पवार ने शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले को सांसद बनने से रोकने के लिए अपनी पत्‍नी सुनेत्रा पवार को चुनाव लड़वा दिया था। हालांकि सुप्रिया सुले ने जीत दर्ज की थी। हाल ही महायुति में सीट बंटवारे को लेकर अजित पवार के दिल्‍ली दौरे के सवाल पर चचेरे बहन सुप्रिया सुले ने अजित पवार पर तंज भी कसा। बोलीं कि 'मुझे सिर्फ एक अजित दादा याद हैं, जिन्हें दिल्ली जाना पसंद नहीं था। मुझे नहीं पता कि वे दिल्ली क्यों गए, क्योंकि मैं महीनों से उनसे संपर्क में नहीं हूं और मैं यह जवाब नहीं दे पाऊंगी कि वे दिल्ली क्यों गए।'

2. लोकसभा चुनाव 2024 अजित पवार NCP का खराब प्रदर्शन

महाराष्‍ट्र में सत्‍तारूढ़ महायुति का हिस्‍सा बनकर अजित पवार भले ही महाराष्‍ट्र सरकार में डिप्‍टी सीएम बन गए, मगर शरद पवार वाली एनसीपी की तुलना में अभी भी उनकी सियासी ताकत कम ही है। इसकी बानगी लोकसभा चुनाव 2024 में देखने को मिली थी।

इसी साल हुए लोकसभा चुनाव में अजित पवार की एनसीपी चार में से सिर्फ एक सीट जीत पाई थी जबकि विपक्षी दल महा विकास अघाड़ी का हिस्‍सा चाचा शरद पवार वाली एनसीपी के उम्‍मीदवारों ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की। लोकसभा चुनाव का परिणाम विधानसभा सीटों के हिसाब से देखें तो NCP (SP) 34 सीटों जबकि अजित पवार एनसीपी छह सीटों पर आगे रही।

3. बन सकते थे एनसीपी के 'वोट कटवा'

अजित पवार की सियासी कहानी हरियाणा के दुष्‍यंत चौटाला से मिलती-जुलती है। दोनों ने ही चाचा से बगावत करके नई पार्टी बनाई और भाजपा वाले गठबंधन में जाकर डिप्‍टी सीएम बने, मगर हरियाणा चुनाव 2024 से पहले दुष्‍यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी ने भाजपा का साथ छोड़ दिया और अकेले के दम पर चुनाव लड़ा। इसके पीछे रणनीति यह थी कि जेजेपी अकेले चुनाव लड़कर जाट वोटों को काट सकती है। इसी तरह से अजित पवार भी अपनी राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को लेकर अकेले चुनाव लड़ते तो शरद पवार एनसीपी के वोट काट सकते थे।

4. एनडीए की लाइन लेंथ से हटकर बयानबाजी

कुछ दिन पहले अजित पवार ने बयान दिया कि वे अपने कोटे से मिले टिकटों में से दस फीसदी टिकट मुस्लिम उम्‍मीदवारों को देने का वादा करते हैं। यह कोई पहला मौका नहीं था जब अजित पवार ने NDA की लाइन लेंथ से हटकर बयानबाजी की हो। एनसीपी के पूर्व मंत्री नवाब मलिक के साथ अजित पवार की सार्वजनिक मुलाकातों पर भी भाजपा में अंदरखाने सवाल उठे। अजित पवार महायुति का हिस्‍सा बने तब से चर्चा शुरू हो गई थी कि वे एनडीए में ज्‍यादा दिन नहीं रहेंगे। जल्‍द घर वापसी करेंगे।

5. बीजेपी की वॉशिंग मशीन में धुलने का ताना

महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में अजित पवार के सामने अजित पवार के सामने अजीब स्थिति है। इन्‍हें अक्‍सर बीजेपी की वॉशिंग मशीन में धुला होने का ताना सुनने को मिलता है। महायुति का हिस्‍सा बनने से पहले भाजपा नेता इन पर कई हजार करोड़ के घोटाले का आरोप लगाते थे, पर एनडीए का हिस्‍सा बनने पर आरोप लगाने बंद कर दिए। ऐसे में विपक्ष गठबंधन महा विकास अघाड़ी हो मीडिया हाउसेस हर कहीं अजित पवार को बीजेपी की वॉशिंग मशीन में धुला होने का ताना देकर मजाक उड़ाया जाता है।

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