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Watch: जहां मरे 767 किसान, वहां अंबादास ने 'बैल' बनकर खुद जोता 4 बीघा खेत, दिलाई 'मदर इंडिया' की याद

Latur Farmer Ambadas Pawar Story: 1957 की फिल्म मदर इंडिया में नर्गिस का खेत में हल खींचने वाला दृश्य शायद आपको याद हो। ऐसा ही मार्मिक नजारा महाराष्ट्र के लातूर जिले से सामने आया है, जहां 65 वर्षीय किसान खुद 'बैल' बनकर अपनी पत्नी के साथ 4 बीघा खेत में हल खींचकर जुताई कर रहा है। यह दिल दहलाने वाला दृश्य उस कठिनाई को बयां करता है, जो आज भी देश के कई किसान झेल रहे हैं।

यह तब हुआ, जब महाराष्ट्र की विधानसभा में जनवरी से मार्च 2025 तक कुल 767 किसानों की आत्महत्याओं के आंकड़ें गूज रहे थे। इसपर विपक्ष ने भी जमकर आवाज बुलंद की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मुद्दे को उठाया, लेकिन हालात जस के तस हैं। इसी बीच, बॉलीवुड एक्टर सोनू सून अंधेरे में किरण बनकर उभरे। सोशल मीडिया के मंच पर उन्होंने ऐलान कर दिया कि हम बैल भेजते हैं। आइए जानते हैं आखिर कौन है ये किसान? क्यों किया ऐसा? क्या थी मजबूरी?

Latur Farmer Ambadas Pawar

वायरल वीडियो ने खोली सच्चाई

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में लातूर के हाडौल्टी गांव के अंबादास पवार अपनी पत्नी के साथ हल खींचते नजर आए। थके हुए कंधे, कांपती बाहें और भारी बोझ से जवाब देते पैरों के बावजूद वे रुकने को तैयार नहीं। अंबादास कहते हैं, 'मेरी बाहें कांपती हैं, पैर थक जाते हैं, लेकिन जिंदगी ने कोई और रास्ता नहीं दिया।' उनकी पत्नी हल को संभालती हैं, ताकि परिवार की रोजी-रोटी चल सके। उनके बेटे पुणे में छोटा-मोटा काम करते हैं, और बेटी की शादी हो चुकी है। अंबादास और उनकी पत्नी अपनी बहू और दो पोतों के लिए यह कठिन परिश्रम कर रहे हैं।

क्यों बने बैल?

अंबादास पवार की कहानी इसका जीता-जागता सबूत है। उनके पास 4 बीघा सूखी जमीन है, लेकिन बैल या ट्रैक्टर का खर्च उठाने की सामर्थ्य नहीं। नतीजा? वे और उनकी 60 वर्षीय पत्नी पिछले 7-8 साल से खुद हल खींचकर खेत जोत रहे हैं।

अंबादास के पास न तो बैल खरीदने के पैसे हैं और न ही ट्रैक्टर किराए पर लेने की क्षमता। एक दिन की जुताई के लिए ट्रैक्टर का खर्च 2,500 रुपये है, जो उनके लिए असंभव है। मजबूरी में वे और उनकी पत्नी खुद ही हल खींचते हैं।

Sonu Sood Help: सोनू सूद बने मसीहा

वायरल वीडियो ने बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद का ध्यान खींचा। उन्होंने X पर पोस्ट पर लिखा, 'आप नंबर भेजिए, हम बैल भेजते हैं।' उनकी इस दरियादिली ने लोगों का दिल जीत लिया। सोनू के इस कदम ने जहां एक ओर सरकार और विपक्ष की नाकामी को उजागर किया।

स्थानीय प्रशासन भी हरकत में

लातूर के तालुका कृषि अधिकारी सचिन बावगे ने बताया कि अंबादास के पास 4 बीघा जमीन है, जो बारिश पर निर्भर है। उनके पास जरूरी उपकरणों की कमी थी और कृषि पहचान पत्र भी नहीं था। प्रशासन ने अब उनके लिए पहचान पत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। जल्द ही उन्हें सरकारी प्रावधानों के तहत 1.25 लाख रुपये की सहायता और एक ट्रैक्टर सहित अन्य उपकरण मिलेंगे।

किसानों की बदहाली का आलम

अंबादास की कहानी उन तमाम वादों की पोल खोलती है, जो सरकारें और नेता हर साल कर्जमाफी और आधुनिक खेती के लिए करते हैं। यह वायरल वीडियो न सिर्फ सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि आखिर कब तक किसान ऐसी मजबूरी में जीते रहेंगे?

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