महाराष्ट्र की इस मज्जिद में क्यों विराजित किए जाते हैं गणपति? पूजा और प्रसाद बनाने में मुस्लिम करते हैं मदद
Ganesh Chaturthi 2025:गणेश चतुर्थी के मौके पर एक बाद फिर महाराष्ट्र का एक गांव सुर्खिर्यों में है। महाराष्ट्र के सांगली जिले में स्थित गोटखिंडी गांव की एक मज्जिद में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित की गई है और हिंदू ही नहीं मुस्लिम समुदाय के लोग इस उत्सव में हिस्सा ले रहे हैं।
आपको ये जानकर हैरानरी होगी कि मुस्लिम समुदाय के लोग गणपति उत्सव में गणपति की मूर्ति स्थापना से लेकर पूजा-पाठ और प्रसाद बनाने की तैयारियों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।

ये आज की परंपरा नहीं है वर्ष 1980 से ऐसे ही मज्जिद में हर बार अनोखा गणेश उत्सव मनाया जा रहा है। जिसमें उत्सव के दौरान, गणेश जी की मूर्ति को एक मस्जिद के भीतर स्थापित की जाती है और मुस्लिम समुदाय के लोग भी पूजा-पाठ और तैयारियों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
प्रसाद तक बनाने में मदद करते हैं मुस्लिम
स्थानीय 'न्यू गणेश तरुण मंडल' के संस्थापक अशोक पाटिल ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में बताया कि देश के अन्य हिस्सों में धार्मिक तनाव का असर इस गांव के निवासियों पर कभी नहीं पड़ा। लगभग 15,000 की आबादी वाले इस गांव में 100 मुस्लिम परिवार रहते हैं, जो इस मंडल के सदस्य भी हैं। वे प्रसाद बनाने, पूजा अर्चना करने और उत्सव की अन्य तैयारियों में सहायता करते हैं।
कैसे शुरू हुई ये अनोखी परंपरा?
मंडल के अध्यक्ष इलाही पठान ने बताया कि हिंदू और मुस्लिम हर साल गणेशोत्सव को बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाते हैं। इस परंपरा की शुरुआत 1961 में हुई थी, जब भारी बारिश के कारण स्थानीय मुसलमानों ने अपने हिंदू पड़ोसियों को गणेश प्रतिमा को मस्जिद के अंदर स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया था। तब से यह परंपरा शांतिपूर्वक जारी है और इसमें मुस्लिम समुदाय की सक्रिय भागीदारी बनी हुई है।
बीते चार दशक से जारी है ये अनोखी परंपरा
मंडल के पूर्व अध्यक्ष अशोक पाटिल ने एक मराठी समाचार चैनल को यह जानकारी दी। हालांकि, इसके बाद कुछ वर्षों तक यह उत्सव नहीं मनाया गया, लेकिन 1980 में 'न्यू गणेश मंडल' का गठन हुआ और तब से यह अनूठी परंपरा लगातार जारी है। पाटिल ने जोर देकर कहा, "तब से इस मस्जिद में गणेश प्रतिमा स्थापित किए हुए 45 साल हो गए हैं।"
10 दिन के लिए मस्जिद में स्थापित की जाती है मूर्ति
दस दिनों के इस उत्सव के दौरान, मूर्ति को मस्जिद में रखा जाता है। अनंत चतुर्दशी पर उत्सव के समापन के बाद, मूर्ति को स्थानीय जलाशय में विसर्जित कर दिया जाता है।
एक बार बकरीद पर मुस्लिमों ने नहीं दी थी कुर्बानी
पाटिल ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक बार बकरीद और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ने पर, मुस्लिम समुदाय ने कुर्बानी से परहेज किया और केवल नमाज़ अदा की।
मुस्लिम समुदाय के लोग हिंदू त्योहारों के दौरान मांस खाने से भी बचते हैं। पाटिल ने बताया पूरे देश को गोटखिंडी गाँव के इस सामाजिक और धार्मिक सद्भाव से प्रेरणा लेनी चाहिए। हर साल, गणेश मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के लिए स्थानीय पुलिस और तहसीलदार को भी आमंत्रित किया जाता है।
Source: DW












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