किसानों का मार्च मुंबई में नहीं जाएगा, सरकार के साथ बातचीत के बाद हुआ समझौता
किसानों और आदिवासियों का मार्च मुंबई में नहीं करेगा प्रवेश, सरकार के साथ प्रतिनिधिमंडल की वार्ता के बाद बनी सहमति। फिलहाल मुंबई से बाहर ही रहेगा किसानों का यह मार्च।

अपनी मांगों को लेकर मार्च कर रहे हजारों किसानों से आज एक बार फिर से प्रदेश सरकार ने बातचीत की। किसान और आदिवासियों के प्रतिनिधिमंडल से सरकार ने बात की। गौर करने वाली बात है कि हजारों की संख्या में किसान और आदिवासी अपनी मांगों को लेकर मुंबई की ओर मार्च कर रहे । लेकिन आज की मुलाकात के बाद प्रतिनिधिमंडल इस बात को लेकर राजी हो गया है कि वह अपने मार्च को आगे नहीं बढ़ाएंगे। पूर्व विधायक जीवा गावित ने कहा कि सरकार हमारी मांग को लेकर राजी हो गई है, हमने उन्हे चार दिन का अल्टिमेटम दिया है कि वह तालुका स्तर पर आदेश को लागू करें। तबतक हमारा मार्च मुंबई की सीमा के बाहर ही वासिंद तक रहेगा। हम अपना मार्च तभी खत्म करेंगे जब समयबद्ध तरीके से वादों को लागू किया जाएगा। नहीं तो हम अपना मार्च जारी रखेंगे और मुंबई के भीतर भी जाएंगे।
आज की बैठक में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, कई मंत्री और अन्य अधिकारी शामिल थे। प्रदेश सरकार में मंत्री दादा भूषे और अतुल सावे ने प्रतिनिधिमंडल से बुधवार रात को मुलाकात की थी। बड़ी संख्या में किसान और आदिवासी नासिक से मुंबई की मार्च कर रहे थे, वह थाणे पहुंच गए थे। जिसके बाद मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को सरकार से बात करने के लिए आज बुलाया था। जो प्रदर्शनकारी मार्च कर रहे थे, उन्होंने लाल रंग का झंडा उठा रखा है। इन लोगों ने यह मार्च नासिक के डिंडोरी से शुरू किया था, यह मार्च 200 किलोमीटर लंबा है, जोकि मुंबई में खत्म होना है। रविवार को सरकार की ओर से कई मांगों को स्वीकार कर लिया था। प्रदर्शनकारियों और आदिवासियों की मुख्य मांग प्याज के दाम में 600 रुपए प्रति कुंटल की सब्सिडी, निर्बाध 12 घंटे बिजली और कृषि लोन माफ शामिल हैं।












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