महाराष्ट्र में बढ़ सकती है फडणवीस सरकार की मुश्किल! राज ठाकरे-उद्धव ठाकरे जल्द उठा सकते हैं ये बड़ा कदम
Maharashtra News: महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बीते दिनों त्रिभाषा फॉर्मूले के तहत कक्षा 1 से 5 तक के पाठयक्रम में तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी भाषा अनिवार्य कर दी है। मराठी भाषी राज्य में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को अनिवार्य किए जाने के फैसले से राज्य में बवाल मच चुका है। राज्य में एक बार फिर मराठी बनाम हिंदी विवाद तूल पकड़ चुका है।
वहीं इस सबके बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे और उनके चचेरे भाई शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, दोनों ने महाराष्ट्र और मराठी भाषी लोगों की बेहतरी के लिए अपने मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे के साथ आने के संकेत दिए हैं। अगर मराठी भाषा आंदोलन के लिए दोनों भाई फिर से साथ आ जाते हैं तो महाराष्ट्र में फडणवीस सरकार की मुश्किल और बढ़ सकती है।

बता दें महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को अलग-अलग कार्यक्रमों में ये कहा कि वो मराठी लोगों के लिए एक साथ आने को तैयार हैं।
राज ठाकरे ने भाई उद्धव के साथ गठबंधन करने के लिए बढ़ाया हाथ
दरसअल, फिल्म निर्माता महेश मांजरेकर के साथ पॉडकास्ट के दौरान राज ठाकरे ने महाराष्ट्र के हितों को प्राथमिकता देने के लिए छोटी-मोटी असहमतियों को नज़रअंदाज़ करने की बात बोली। उन्होंने उद्धव ठाकरे के साथ संभावित गठबंधन का संकेत दिया।
"मैं छोटे-मोटे विवादों को दरकिनार कर सकता हूं"
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कहा "मेरे लिए, महाराष्ट्र का हित बड़ा है और बाकी सब उसके सामने गौण है। इसके लिए मैं छोटे-मोटे विवादों को दरकिनार कर सकता हूं और मैं उद्धव के साथ काम करने के लिए तैयार हूँ। बस सवाल यह है कि क्या वह भी इसके लिए तैयार हैं।"
उद्धव ठाकरे ने भी दिए गठबंधन के संकेत
वहीं दूसरी ओर राज ठारके के चचेरे भाई ने शनिवार को उद्धव ठाकरे ने शिवसेना (यूबीटी) की ट्रेड यूनियन शाखा भारतीय कामगार सेना की एक सभा को संबोधित करते हुए राज ठाकरे के साथ आने की बात कही हालांकि इसके लिए उन्होंने शर्त भी रखी है।
"मैं मराठी के लिए छोटे-मोटे विवादों को..."
उद्धव ठाकरे ने कहा "मैं भी मराठी भाषा और महाराष्ट्र के लिए छोटे-मोटे विवादों को अलग रखने के लिए तैयार हूं। मैं साथ काम करने के लिए तैयार हूं, लेकिन उन्हें (राज) महाराष्ट्र विरोधी लोगों और दलों की मेजबानी नहीं करनी चाहिए और छत्रपति शिवाजी महाराज के सामने शपथ लेनी चाहिए।"












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